Saturday, 29 December 2018
फुरसत
Friday, 28 December 2018
शमा-परवाने
तुझे देख रहे थे...
Monday, 24 December 2018
हमेशा देर कर देता हूं मैं
हमेशा देर कर देता हूं मैं,
सुबह जल्दी से उठना हो,
ब्रेकफास्ट करने जाना हो,
लगाकर ब्रेड को बटर,
जल्दी टोस्ट बनाना हो,
हमेशा देर कर देता हूं मैं।
जाकर क्लास में जल्दी,
अटेंडेंस लगाना हो,
असाइनमेंट करके आना हो,
प्रिंट आउट लेके आना हो,
हमेशा देर कर देता हूं मैं।
हो श्याम को पहेचान किसी हुस्न वाले से,
साथ उसके वक़्त थोडा सा बिताना हो,
कभी इजहार करना हो, कोई इकरार करना हो,
हमेशा देर कर देता हूं मैं।
(मुनीर नियाज़ी के कलाम से मुतासिर)
Monday, 17 December 2018
इन्सा को
Thursday, 13 December 2018
नज़दीकियां
लोकल
Sunday, 9 December 2018
यार तुझे ऐसा क्यू लगता है...
जिस तिनके पे...
Friday, 7 December 2018
बनके अाईना
Thursday, 6 December 2018
ये कभी ना कभी होना था...
Wednesday, 5 December 2018
पॉजिटिव
Monday, 26 November 2018
गुपित
Sunday, 18 November 2018
कभी कभी लगता है की अपुन ही भगवान है...
Monday, 12 November 2018
ख़ाली हो गया घर
Friday, 9 November 2018
हर्ज़ ही क्या है...
Wednesday, 7 November 2018
रात
Tuesday, 6 November 2018
उलझन
Sunday, 28 October 2018
अच्छा हो
खूबसूरत हैं आप और आप पर ही दिल आया हैं,
अगर आप ये जान लो तो अच्छा हो।
वक़्त हुआ है के हम लौट के जा रहे हैं,
जाने से पहले आप हमें पहचान जाओ तो अच्छा हो।।
जब कभी
मुस्कुराते चेहरें ...
Monday, 22 October 2018
जिंदगी
अरमानों का बोझ लिए चल रही है जिंदगी,
जाने किस मोड़ से गुजर रही है जिंदगी।
उम्र भर मेहनत की, हासिल ये मकाम किया,
और किस मकाम की उम्मीद, कर रही है जिंदगी।।
युं तो कहने सुनने को, कई अपने पास है,
हाल-ए-दिल कहने से क्युं, झिझक रही है जिंदगी।
बस झिझक जाने से, अपने दूर हो जाते हैं,
जान-बुझकर रिश्तों को, क्यु बिखर रही है जिंदगी।।
जानते है गुरूर की, इंतेहा मगर फ़िर भी,
जाने किस पे गुरूर, कर रही है जिंदगी।
वो कौन सा चिराग़ है, जला है और बुझा नहीं,
'नवाज़' का कलाम, याद कर रही है जिंदगी।।
Thursday, 11 October 2018
किस्मत
किस्मत ने ली करवट तो क्या क्या नहीं होता,
मगर ये क्यूं होता है के तु मेरा नहीं होता।
मारकर दिल को अपने फ़िर भला हम मुस्कुराइए क्यूं,
और किस मुस्कुराहट पर ज़माने का पहरा नहीं होता।।
तुमने छोड़ा ना ज़माना, और तुम करती भी क्या,
किसी पराये पर यूंही भरोसा नहीं होता।
तुम और मैं, दोनों, हाथ मिलाते रह गए,
काजल आंखों का होता है, नज़र का नहीं होता।।
अल्हड़पन, मासूमियत हम दोनों को ले डूबी,
वक़्त ने कुछ और वक़्त दिया होता तो क्या होता।
तुम सामने आओ और जान लूं की तुम ख़ुश हो,
तुम्हारे दीदार से ज्यादा कोई पल सुनहरा नहीं होता।।
कुछ तो रिश्ता रहा होगा पिछले जनम का तुमसे,
यूंही किसी से रिश्ता कोई गहरा नहीं होता।
किस्मत ने ली करवट तो क्या क्या नहीं होता,
मगर ये क्यूं होता है के तु मेरा नहीं होता।।
Monday, 17 September 2018
वास्ता
Sunday, 16 September 2018
मोबाईल
जो मोबाईल जुड़ता गया, रिश्ते टूटते गए,
जब रिश्ते टूटते गए, तो हम भी टूटते गए...
Saturday, 15 September 2018
प्यास
Thursday, 13 September 2018
रुलाते क्यूँ हो...
मिटाने तुझ पे अपनी जान हम तैयार भी है,
Wednesday, 12 September 2018
कोवळं प्रेम
Wednesday, 5 September 2018
कुत्ता
फिक्र जिनकी की होती है, वो जमात ही कुछ और है,
कुत्ता हूं मैं सड़क का, मेरी बात ही कुछ और है।
गंदा सा रहेता हूं मैं, टुकडों पर पलता हूं,
मेरा दिन कुछ और है, मेरी रात ही कुछ और है।।
ना इंसान बनाओ मुझे की मै गिरना चाहता नहीं,
इंसान धोखेबाज हैं मेरी बात ही कुछ और है।
मुझे मेरे मालिक की जुस्तजू, मुझे मेरी रोटी से प्यार है,
चाहे हिन्दू हो या मुसलमां हो, वो बात ही कुछ और है।।
आज का दिन...
कुछ अच्छा यार तो हो आज के दिन,
बस उनका दीदार तो हो आज के दिन।
उन्हीं के तस्सव्वूर में निकल रहे थे DH से,
वो मुस्कुराए सामने आकर, आज के दिन।।
हो खुदाया गर तेरी यूंही रहेमत,
जिंदगी भर रहे यू आज का दिन।
एक बाकी है इज़हार ए मोहब्बत यारों,
शायद मिल जाए मुझे आज का दिन।।
Monday, 3 September 2018
बहु दिन भए प्रभु...
बहु दिन भए प्रभु, जरा रूप दिखाओ,
या धुन बांसुरी की कोई सुनाओ।
सम्भवामि युगे युगे कहेके चले गए,
बहु युग चले गए हैं प्रभु लौटके आओ।।
बनके सखा जरा यारी सिखाई दो,
करें गोपियों की इज्ज़त ये बताई दो।
या हो कोई पीड़ा परबत बनी हुई,
करंगुली पे अपनी पीड़ा उठाई दो।।
जो लीला आपने रची मिलने सुदामा को,
उस तरह की प्रभु कोई लीला तो दिखाओ।
बहु दिन भए प्रभु, जरा रूप दिखाओ,
या धुन बांसुरी की कोई सुनाओ।।
Thursday, 23 August 2018
बाशिंदा
वो पेड़ों का मैल है, जिसपे तुम जिंदा हो,
क्या पेड़ों के कटने से, जरा भी शर्मिंदा हो।
धरती सहे रही है सब, इसका ना इम्तेहान लो,
मिटा रहे हो जिस धरती को, उसके तुम बाशिंदा हो।।
Monday, 20 August 2018
किसान
सबको खाना देता था, वो कई दिनों से भूखा था,
सुना है एक गांव में, कोई किसान रहेता था,
बेटी की शादी करनी थी, बेटे को भी पढ़ाना था,
गिरवी थे जो बीवी के गहेने भी छुड़वाना था,
इस बार जरूर मिलेगा भाव, हर बार ये कहेता था,
सुना है एक गांव में, कोई किसान रहेता था।
अब खेती की फ़िक्र नहीं, रोटी भी अब रोज मिलेगी,
आत्महत्या कर ली उसने, सरकार "मदत" तो जरुर करेगी,
सुख चुका है अब वो पानी, आंखों में जो बहता था,
सुना है एक गांव में कोई किसान रहता था,
सबको खाना देता था, वो कई दिनों से भूखा था।।
जिंदगी
हम समेटते जायेंगे जब बिखरती जाएगी,
जिंदगी हमारी तो यूंही चलती जाएगी।
गुज़र रहा है वक्त जिस ख़ामोशी से,
ख़ामोश रहे तो उसी तरह जिंदगी गुजरती जाएगी।।
ख़ामोश हैं हम तो है जमाना हमारा यार,
बोलने लगे तो यारी टूटती सी जाएगी।
एक मोहब्बत की शमा दिल में जलाए रक्खे हैं,
इसी तरह तो जिंदगी उजलती जाएगी।।
Sunday, 19 August 2018
जिहाद
सियासत चला पाओगे तुम, ये दिल नहीं मानता,
देश बचा पाओगे तुम, ये दिल नहीं मानता।
संविधान का रास्ता बहुत मुश्किल है तुम्हारे लिए,
इस रास्ते पे चल पाओगे तुम, ये दिल नही मानता।।
तुम्हारी सोच अलग है, तुम्हारे यार-दोस्त अलग,
हमारे साथ रह पाओगे तुम, ये दिल नहीं मानता।
रोटी, कपड़ा और मकान जरूरतें है हमारी,
ये दिला पाओगे तुम? ये दिल नहीं मानता।।
जो पढ़ने लिखने का हक हमसे छीन रहे हो तुम,
हम पढ़ना लिखना छोड़ देंगे ये दिल नहीं मानता।
भीमा ने कहा के पढ़ो, मिलकर जिहाद करो,
भीमा को चुप कराओगे तुम, ये दिल नहीं मानता।।
Thursday, 16 August 2018
सहारा
Friday, 10 August 2018
बदल जाते हैं...
रिश्ते बदल जाते हैं, नाते बदल जाते हैं,
वक्त बदलता है तो लोग बदल जाते हैं।
हमको भी ना समझना कोई दुध का धुला,
हो कोई मजबूरी हो तो, हम भी बदल जाते हैं।।
सीखी हैं जहान से जो बातें नई नई,
पैमाने अदब-ओ-हया के, सारे बदल जाते हैं।
पहनते थे कल तक सिल कर फटे कपड़े,
फटे ना हो तो अब कपड़े बदल जाते हैं।।
मजहब ये तेरा मेरा है सियासती खेल,
चलो यारों इंसानों में सारे बदल जाते हैं।
रक्खों ना कोई उम्मीद जमाने को बदलने की,
ख़ुदको बदल के देखो, जमाने बदल जाते हैं।।
Thursday, 9 August 2018
सांवरी...
तेरी जुल्फों से होकर जो हवाएं गुजरती हैं,
बस वही शायरी बनके मेरी कलम से उतरती हैं।
लाज़मी होगा तुझको गुरूर - ए - हुस्न होना,
जो इतनी नजरें तुझपर, चलती हैं, रुकतीं हैं।।
चलना तेरा चमन में, नहीं कोई छोटी बात,
तेरे ही तो पिछे ये बहारें चलती हैं।
सांवरा सा रंग तेरा, तुझसे ही है श्याम,
तेरी ही इजाजत से तो रात उगती ढलती है।।
Wednesday, 8 August 2018
मुश्किल है...
आवाम का सरकार से हाथ मिलाना भी मुश्किल है,
आवाम का सरकार से दूर जाना भी मुश्किल है।
सरकार जब माने है पैसेवालों को सरकार,
आवाम का फिर आवाज़ उठाना भी मुश्किल है।।
पैर है जिस जमीं पर मेरे, वो जमीं मेरी नहीं,
हाथ उठाकर आसमां को, नीचे लाना भी मुश्किल है।
ऐ धरती मां बता क्या हम तेरे बच्चें नहीं,
क्या बच्चों का अपनी मां पे हक जताना भी मुश्किल है।।
Tuesday, 7 August 2018
इंतजाम
कमालिये दुनिया में जितने रिश्ते थे कमाने से,
गुजरते गुजरते गुजर जायेंगे जमाने से।
हसते मुस्कुराते रहते हैं सबके साथ,
वरना हम नहीं हैं कुछ याद आने से।।
हमारे ना होने से, अच्छा ये काम होगा,
खाली मयखाने का, एक जाम होगा।
हसीनाओं का हमसे छूटेगा पिछा,
यारों के कानों को आराम होगा।।
जिंदा हूं तो हूं दिलफेंक मनचला सा,
मरने के बाद मेरा, ना कोई काम होगा।
Notebook, cellphone, बिस्तर मेरे room में रहेंगे,
कब्र में कफ़न से बस, मेरा इंतजाम होगा।।
Wednesday, 1 August 2018
मेरी दुनिया अलग है तुम्हारी दुनिया से...
Monday, 30 July 2018
तुम मुझे जानती हो...
ये जानकर अच्छा लगा कि तुम मुझे जानती हो,
मेरा नाम, मेरी शक्ल भीड़ से भी पहेचानती हो।
तुम ऊंचे society, class से आती हो मगर फिर भी,
अंग्रेजी में हुर, परी कहलाती हो मगर फिर भी,
ये जानकर अच्छा लगा कि तुम मुझे जानती हो,
मेरा नाम, मेरी शक्ल भीड़ से भी पहेचानती हो।
Branded चीजें ना पहनने वाले हैं हम मगर फिर भी
Laptop ना होने से CC में वक़्त बिताने वाले हैं हम मगर फिर भी
अंग्रेज़ी फटाफट ना बोलनेवाले हैं हम मगर फिर भी
अपना दिल तपाक से नहीं खोलते हम मगर फिर भी
ये जानकर अच्छा लगा कि तुम मुझे जानती हो,
मेरा नाम, मेरी शक्ल भीड़ से भी पहेचानती हो।
Sunday, 29 July 2018
कैसे बताऊं...
और मेरी नजरें तुझे निहार रही होती हैं
तेरे चेहरे का shape मुझे बहोत प्यारा लगता है
तेरी छोटी सी, प्यारी सी आंखें जब सारी दुनिया को देखते हुए मुझपर से गुजरती हैं
तो मुझे कोई ख़ास होने का एहसास होता है
की मैं तुम्हें कितना प्यार करती हूं
मगर बता नहीं पाती
कहीं तुम कुछ ग़लत समझकर बात करना ना छोड़ दो
इस बात से डरती हूं
और मैं उन पलों में सारी जिंदगी जी लेती हूं
कैसे बताऊं के मैं तुम्हें चाहती हूं
कैसे बताऊं कि मै तुम्हें प्यार करती हूं
कैसे बताऊं...
जहां देखो तुम...
जहां देखो तुम वहां
हम ही नजर आते हैं,
देखो तो कहां कहां
हम ही नजर आते हैं।
शायद ये सच नहीं
बस आपका गुमान है,
आपके ख़्वाबों- खयालों में
बस हम ही नज़र आते हैं।
Saturday, 28 July 2018
हम जीत के आ रहे हैं...
तालियां बजाए की हम जीत के आ रहे हैं।
Football खेल नहीं अनाड़ियों का,
हमको खिलाड़ी बुलाएं की हम जीत के आ रहे हैं।
नाचें गाए के हम जीत के अा रहे हैं।
DH में बने कुछ मिठाई-विठाई,
और, autograph हमसे ले जाएं के हम जीत के अा रहे हैं।
तु मला पाहिले जेव्हा...
Thursday, 26 July 2018
जब लड़ता हूँ खुद से...
दर्द बहोत सहता हूँ
तभी सुकून बहोत पाता हूँ
मैदान में जैसे एक जंग छिड़ी होती है
सारे ground की नजरें हम पर ही गड़ी होती हैं
हम football लेकर दौड़ रहे होते हैं
सामने opponent की दिवार खड़ी होती है
जी जान लगाकर मैं उनसे भीड़ जाता हूँ
चोट लगती है, बदन छील जाता है
शायद ही किसी नजर में ये आता है
जब लड़ता हूँ खुद से, तब दुनिया से लड़ पाता हूँ
कोई पूछे ये जिंदगी क्या है
धूल मिट्टी में ये ख़ुशी क्या है
जो न समझे मेरे जुनूँ को कभी
मुर्दा उनकी ये जिंदगी क्या है
Monday, 23 July 2018
हिजाब
शायर को कोई शेर शबाब में मिलता है,
मुझको यार मेरा हिजाब में मिलता है,
जहां पे करता है वो अदा नमाज़,
वहां मेरा रब मुझे ख़्वाब में मिलता है।
Thursday, 19 July 2018
मेरी शरीक-ए-हयात, मेरी जाना...
मेरी शरीक-ए-हयात, मेरी जाना,
रोज की तरह आज भी
तेरा मेरे तसव्वुर में होना
तेरा साथ रहना
तेरा मुझे सहना
मेरी गलत बातों को भी
तेरा सहीं कहना
मुझे फिर मेरी गलती का एहसास दिलाना
गुस्सा हो के दूर बैठू
तो मुझे पास बुलाना
मेरे बेकार से जोक पर
दिल खोल के खिलखिलाना
मैं करूं तारीफ तेरी तो
बस धीमे से शर्माना
ख्याल रखकर मेरा
मुझसे प्यार जताना
हफ्ते भर लंबे
मेरे इंतजार में रहना
हो कोई परेशानी
किसी से ना कहना
तारीफ में तुम्हारी
लफ्ज़ मेरे कम है
तुम से ही जिंदगी में मेरी
बहार का मौसम है
मेरी जिंदगी में होने का बहुत-बहुत शुक्रिया,
मेरी जिंदगी में होने का बहुत-बहुत शुक्रिया।
हबीब
तू मेरे करीब, और करीब हो रही है।
होंगे रूबरू तो, ये इजहार करेंगे,
ऐ हुस्नवाली मेरी, हबीब हो रही हैं।