Saturday, 29 December 2018

फुरसत

तेरे गम तेरे गिले तेरे शिकवे, 
सुनने की फुरसत निकाल लूंगा,
तू मिल कभी मुहब्बत की राह पर, 
मिलने की फुरसत निकाल लूंगा।
अकेली रहती है, ये तो कोई बात नहीं,
दुकेली रह, मै फुरसत निकाल लूंगा।।
तेरे रूप की है बात तो तू सोच भी मत,
मेहताब मैं कई सारे तुझसे निकाल लूंगा।
तू गुमसुम, चुप जो रहेती है,
मै बात कोई तुझसे निकाल ही लूंगा।।



Friday, 28 December 2018

शमा-परवाने

वही शमा वही परवाने हैं,
उसी चमक के दीवाने हैं।
सूरत बदलती जानी है,
किरदार वही रहे जाने हैं।।

ना पूछ ये कैसी शिद्दत है,
ना पूछ ये क्या मुहब्बत है।
ये सारे परवाने ऐसे,
जिस आग में जल-जल जाने हैं।।

तुझे देख रहे थे...

हसीं लम्हों की बात हो रही थी,
और हम तुझे देख रहे थे।
हुस्न ओ इश्क की बात हो रही थी,
और हम तुझे देख रहे थे।।

यूं तो महेफिल च नाचनेवाले थे बहोत
और हम तुझे देख रहे थे।
मिल जाता हमें मिलने को साथी कोई,
मगर हम बस तुझे देख रहे थे।।

Monday, 24 December 2018

हमेशा देर कर देता हूं मैं

हमेशा देर कर देता हूं मैं,
सुबह जल्दी से उठना हो,
ब्रेकफास्ट करने जाना हो,
लगाकर ब्रेड को बटर,
जल्दी टोस्ट बनाना हो,
हमेशा देर कर देता हूं मैं।

जाकर क्लास में जल्दी,
अटेंडेंस लगाना हो,
असाइनमेंट करके आना हो,
प्रिंट आउट लेके आना हो,
हमेशा देर कर देता हूं मैं।

हो श्याम को पहेचान किसी हुस्न वाले से,
साथ उसके वक़्त थोडा सा बिताना हो,
कभी इजहार करना हो, कोई इकरार करना हो,
हमेशा देर कर देता हूं मैं।

(मुनीर नियाज़ी के कलाम से मुतासिर)

Monday, 17 December 2018

इन्सा को


इन्सा को इन्सान से नफ़रत जुदा करें,
फिर कौन अपनी दोस्ती का हक अदा करें।
मुझे मेरे यारों का मजहब ना बताओ,
कोई पूजा किया करें, कोई सजदा किया करें।।

हैं हिन्द की मिट्टी में उगे हम चमन के फूल,
लाएँ बहार और, खुलकर खिला करें।
वो एक ही हवा है जो खुशबू बहाती है,
चंपा खिला करे या चमेली खिला करें।।

मजहब में ना बांधो उस पाकीजा जमीं को,
जिस से निकलें पानी और प्यास बुझा करें।
मिल जाए जब गंगा और जमना का पानी,
कौन भला अब ये, पानी जुदा करें।।

Thursday, 13 December 2018

नज़दीकियां


नज़दीकियां बढ़ीं है, तेरे साथ रहते रहते,
अरमान रुके हैं आ के, तेरे पास बहते बहते।
जानू ना नाम तेरा, तेरा देश मैं न जानू,
तुझे मेरा कह रहा हूं, तुझे अपना कहते कहते।।

कब तक चुभेगी हमको, जमाने भर की नजरें,
कब तक रहेंगे ऐसे, हम दर्द सहते सहते।
चल छोड़ कर जमाना, हैं दूर चले जाते,
ये छाप-तिलक वाले, हमें ढूंढते ही रहते।।

लोकल


कीड़े की जिंदगी मैं छोड़ कहां जाऊ,
लोकल की जिंदगी मैं छोड़ कहां जाऊ।
अपने लिए रोटी, मुश्किल से तो लाता हूं,
अपने लिए अलग से गाडी कहां से लाऊं।।

मैं हूं वो पत्थर जो बुनियाद में लगता है,
चोटी पे इमारत की मैं कैसे भला जाऊं।
दबना अब तो अपनी आदत सी बन गई है,
घर, लोकल, जिम्मेदारी, बस दबता चला जाऊं।।

ये किस्सा है बहोत का, मैं हिस्सा हूं बहोत का,
किस किस की बात सोंचु, किस किस की आेर जाऊं।
मैं भीड़ का हिस्सा हूं, मुझे भीड़ में रहेने दो,
होकर मैं जुदा इनसे, पलभर में पिचक जाऊं।।

Sunday, 9 December 2018

यार तुझे ऐसा क्यू लगता है...

यार, तुम्हें ऐसा क्यू  लगता है 
वो देख के मुस्कुराई तो तुझे प्यार ही करती होगी 
तेरे ब्रैंडेड इंटीरियर पे वो जरूर मरती होगी 
यार तुझे ऐसा क्यू लगता है 

यार तुम्हें ऐसा क्यू लगता है के 
DH मैं बैठ के अकेले breakfast कर रही है 
तो वो दुःखी है 
कभी घर की यादो को आसुओं से हल्का कर रही है 
तो वो दुःखी है 
कभी friend के कंधे पे सर रख कर सुकून की साँसे ले रही है 
तो वो दुःखी है 
बस एक तुम ही हो जिसके साथ वो सुखी रह सकती है 
यार तुम्हें ऐसा क्यू लगता है

यार तुम्हें ऐसा क्यू लगता है के 
उसने पुरे कपडे पहने है तो वो दुनियादारी नहीं समझती,
डरी, सहमी हैं, उसे कुछ पता नहीं होगा
उसने अगर छोटे कपडे पहने है तो वो बहोत बोल्ड है 
बहोत advance है, उसे हमेशा सेक्स करने का मन होता होगा, 
यार तुम्हें ऐसा क्यू लगता है

यार तुम्हें ऐसा क्यू लगता है के 
किसी के साथ वो हसके बात कर रही है 
Breakfast dinner साथ कर रही है 
तो उसका कुछ चक्कर चल रहा है, जो बुरा है 
(तुम्हारे साथ चलता तो अच्छा होता)
यार तुम्हें ऐसा क्यू लगता है

यार तुम्हें ऐसा क्यू लगता है के 
दिल सिर्फ तुम्हारे पास है, उसके पास है ही नहीं 
उसका दिल किसी पे आ ही नहीं सकता, ये अच्छी हरकत ही नहीं 
वो किसी को I Love You नहीं कह सकती, इसकी इजाज़त ही नहीं 
यार तुम्हें ऐसा क्यू लगता है

मेरे यार, मेरी एक बात मान 
अपने दिल को साफ़ कर और ये बात जान 
सब के पास दिल है, जैसे तुझे है, वैसे उसे है 
सब के पास आज़ादी है, जैसे तुझे है, वैसे उसे है



जिस तिनके पे...

जिस तिनके पे ना ऐतबार था मुझको,
मै डूबने लगा तो वहीं काम आया।
पलट गई बाज़ी मैदान-ए-जंग की,
आगाज क्या था, क्या अंजाम आया।।

जब उम्मीद न थी प्यास बुझने की,
तभी मेरे हाथों में जाम आया।
गुम होने लगा जब छोड़कर दुनियादारी,
तभी दुनिया का सलाम आया।।

वक़्त पर सच किसी ने ना कहा,
जुबां पे बस झूट तमाम आया।
छोड़ दे किसको बहेलाता है 'वसीम',
झुटों में तेरा ना नाम आया।।

Friday, 7 December 2018

बनके अाईना

बनके अाईना हम जिनसे मिलते हैं,
वो लोग हमसे नफरत सी करते हैं।
अपनी तो बेबाक जिंदगी है बहोत,
हम कहां टूटने से डरते हैं।।

राह-ए-अदब की चलते हुए,
बस शराफत को दिल में रखते हैं।
अकीदत है तो है बस उर्दू पे,
जमाने से बगावत का हुनर रखते हैं।।

उतनी औकात जमाने की अब रही ही नहीं,
सोचा साझा कोई खयाल करते हैं।
हैं कुछ यार, हमें देख मुस्कुराते हैं,
शामें कुछ उनके संग गुजार करते हैं।।

Thursday, 6 December 2018

ये कभी ना कभी होना था...

जानता था, ये कभी ना कभी होना था,
फासला ज्यादा होना था, रास्ता जुदा होना था।

लेकिन ये नहीं पता था के रास्ते फिर मिलेंगे,
हम, जो इक दूजे के बस कॉल की ही उम्मीद कर सकते थे,
अचानक इक दूजे के रूबरू होंगे,
जैसे हम मिलना चाहते हो, जैसे कोई मिलाना चाहता हो,

लेकिन अब मै वो मैं नहीं रहा, ना ही तुम वही तुम हो,
पहले मै तुम्हें देखता तो तुम्हारी ओर दौड़ा चला आता,
तुम भी मेरी बातों पर खिलखिलाकर हस देती,

लेकिन अब ऐसा कुछ नहीं होता,
हां, तुम्हे देखकर मेरी आंखों में चमक अा तो जाती है,
और मुझे देखकर तुम दूर से ही मुस्कुराती हो,
लेकिन अब मै वो मैं नहीं रहा, ना ही तुम वही तुम हो,
और ना मैं तुम्हारे साथ हूं, ना तुम मेरे साथ हो,

ख़ैर, ये कभी ना कभी होना था,
फासला ज्यादा होना था, रास्ता जुदा होना था...

Wednesday, 5 December 2018

पॉजिटिव

वो पुछते हैं, कुछ अच्छा क्यू नहीं लिखते,
ग़म के नगमें लिखते हो, 
खुशी के किस्से क्यू नहीं लिखते।

दूर से भी आंखों में आसू देख लेते हो,
पास में देखी मुस्कानें, 
क्यू नहीं लिखते।।

यूं तो तुम शायर बने फिरते रहेते हो,
हमेशा नेगेटिव लिखते हो, 
पॉजिटिव क्यू नहीं लिखते।

Monday, 26 November 2018

गुपित

शतायुषी होण्याचं गुपित तुम्हाला सांगतो,
आमच्या घरी आम्ही रानभाज्या आणतो...

शेवगा असतो अंगणात, उंच उंच वाढलेला,
पाठी परसामध्ये असतो, अळू, वांगा पेरलेला।
हिरव्या मिरच्या, कडी पत्ता, पाहिजे तेंव्हा काढतो,
आमच्या घरी आम्ही रानभाज्या आणतो।।

घरच्या घरी भाजीपाला, रासायनिक विष नसतं,
आनंद होतो खाताना जे स्वकष्टाचं असतं।
ऋतू सोबत भाज्या बदलून गवार भेंडी काढतो,
आमच्या घरी आम्ही रानभाज्या आणतो।।

भाजी असते ताजी नसते कुपोषणाची भीती,
परसात बाग, बागेत भाज्या हीच आपली रीती।
आपल्या भल्या चाली-रीती आम्हीं देवा पाळतो,
आमच्या घरी आम्ही रानभाज्या आणतो।।

शतायुषी होण्याचा गुपित तुम्हाला सांगतो,
आमच्या घरी आम्ही रानभाज्या आणतो...

Sunday, 18 November 2018

कभी कभी लगता है की अपुन ही भगवान है...


सर पे अपने कफ़न है, हथेली पे जान है,
कदमों तले जमाना रखने का अरमान है।
जिंदगी जीते है अपने ही शर्तों पे,
कभी कभी लगता है की अपुन ही भगवान है।।

डरने वालों को डराती है ये दुनिया,
अच्छे लोगों को सताती है ये दुनिया।
दुनियादारी से अपनी पुरानी पहेचान है,
कभी कभी लगता है की अपुन ही भगवान है।।

झगड के दुनिया से जो यार पा लिया,
कर्म ही कुछ ऐसे के उसको गवॉ दिया।
बसा रहे हैं दुनियॉ जो विरान है,
कभी कभी लगता है की अपुन ही भगवान है।।

नास्तिक भी हुए, भगवान पे भरोसा भी किया,
घंटा भगवान को फर्क नहीं पड़ता, ये जान भी लिया।
हम ही भगवान है, यही हमारी पहेचान है,
कभी कभी लगता है की अपुन ही भगवान है।।

जब सितारों में लौट के जायेंगे अपुन,
हटाकर सुरज खुद जगमगाएंगे अपुन।
हर जगह चमकना अपनी शान है,
कभी कभी लगता है की अपुन ही भगवान है।।




Monday, 12 November 2018

ख़ाली हो गया घर

महेमां आकर चले गए तब ख़ाली हो गया घर,
धड़कन दिल की सुनाई दी, जब ख़ाली हो गया घर।
दो दिन लगा जैसे पल भर में ही गुजर गए,
पल सदियों सा लगने लगा, जब ख़ाली हो गया घर।।

आदत हुई थी पहेले हमको, तनहा तनहा रहेने की,
आदत टूटी पता चला जब ख़ाली हो गया घर।
बच्चे थे, शोर था, घर में रौनक लगती थी,
रौनक आकर चली गई, जब ख़ाली हो गया घर।।

जब महेमां थे घर में तो, लब पे थी मुस्कान बड़ी,
आसू अा गए आंखों में जब ख़ाली हो गया घर।
हसता खिलखिलाता घर, घर जैसा लगता था,
बस मकान रह गया, जब ख़ाली हो गया घर।।

Friday, 9 November 2018

हर्ज़ ही क्या है...


यूं तो मिलाता हूं नज़रें तुमसे, हाथ मिलाने में हर्ज़ ही क्या है।
तुम्हारे हुस्न के बारिश में, भीग जाने में हर्ज़ ही क्या है।।

रात घनेरी, सुबह को देरी, सो जाने में हर्ज़ ही क्या है।
तुम्हारा खयाल, तुम्हारे सपने, अा जाने में हर्ज़ ही क्या है।।

प्यासा हूं मैं सालों से और, मयखाना भी पास नहीं।
नज़रें तुमसे पल दो पल को, मिल जाने में हर्ज़ ही क्या है।।

इक दुल्हन की कोरी हथेली, और तुम हिना कोई हो।
दुनियां मेरी कुछ ऐसे ही, सजाने में हर्ज़ ही क्या है।।

जात-धरम सब लगता है, इस दुनिया का वहम ही है।
ये सब कुछ पल को भुलाकर, मुस्काने में हर्ज़ ही क्या है।।

दिल कहेता है खुशियों पर, यूं तो हम सबका हक है।
साथ में सबके ईद-दिवाली, मनाने में हर्ज़ ही क्या है।।

Wednesday, 7 November 2018

रात

तुम्हारे सोने के बाद आई थी,
तुम्हारे जगने से पहले चली गई।
वो रात मेरे कानों में,
एक बात कहेके चली गई।।

मैं हूं राजा रातों का,
वो रात की जैसे रानी है।
उसे इश्क़ है मुझसे बहोत,
ये बात वो कहेके चली गई।।

मेरे साथ ये जो खयाल है,
उसे इसका ही तो मलाल है।
ना कोई दिखाया ख़्वाब बस,
वो साथ निभाके चली गई।।

जो रात मेरे संग होती तो,
परछाई मेरी खो जाती है।
अपने और पराए की,
पहेचान कराके चली गई।।

Tuesday, 6 November 2018

उलझन

तुझे प्यार करूं या ना करूं, बड़ी उलझन में हूं,
चाहत पा लूं या पेट भरूं, बड़ी उलझन में हूं।
सुना था पैसा तो हाथों का मैल होता है,
हाथ कहां मैले करूं, बड़ी उलझन में हूं।।

यूं तो नहीं है सीधा, रस्ता ये दुनियादारी का,
कैसे टेढ़ा रस्ता चलूं, बड़ी उलझन में हूं।
कदम कदम पर नफ़्स को उकसाने वाली चीजें हैं,
कैसे ईनका सामना करूं, बड़ी उलझन में हूं।।

जिंदा लाश बने रहेना, जमाने को पसंद तो है,
मैं जिंदा रहूं या लाश बनूं, बड़ी उलझन में हूं।
जमाने का जहन देखो, बस नफ़रत ही नफ़रत है,
मेरे दिल की मोहब्बत क्या करूं, बड़ी उलझन में हूं।।

Sunday, 28 October 2018

अच्छा हो


रोज-ब-रोज अपनी मुलाक़ात हो, तो अच्छा हो,
सुकून दे जो दिल को, ऐसी बात हो तो अच्छा हो।
यूँ तो मिलते है रोज मगर अंजानो की तरह,
कभी अपनों की तरह मिल लो तो अच्छा हो।।

खूबसूरत हैं आप और आप पर ही दिल आया हैं,
अगर आप ये जान लो तो अच्छा हो।
वक़्त हुआ है के हम लौट के जा रहे हैं,
जाने से पहले आप हमें पहचान जाओ तो अच्छा हो।।


जब कभी


जब कभी खुदको टूटता पाया हमने,
अपनी किस्मत पे ऐतराज जताया हमने।
और हम करते भी तो क्या करते,
खुद को था जिन हालात में पाया हमने।।

घने कोहरे में जब राह दिखाई ना दी,
प्यार से ठोकरों को भी खाया हमने।
स्याह थी रात और कुछ नजर ना आता था,
वक्त आने पर खुद को भी जलाया हमने।।

अब भी जब कभी पाया है गम,
देख आँखों में जिंदगी के मुस्कुराया हमने।
जिंदगी के उठाये हर नाज-ओ-अंदाज,
और जिंदगी से मोहब्बत को निभाया हमने।।

जब कभी खुदको टूटता पाया हमने,
अपनी किस्मत पे ऐतराज जताया हमने...

मुस्कुराते चेहरें ...



मुस्कुराते चेहरे अक्सर खतरनाक होते हैं,
काली अमावस की रात होते हैं.
दिखाई नहीं देते होंगे मगर,
समझ नहीं आते होंगे मगर,
मुस्कुराते चेहरे अक्सर खतरनाक होते हैं,
काली अमावस की रात होते हैं.

बहोत गम सहे होते हैं,
टुटके बहोत बिखरे होते हैं,
हालात की आग में झुलसकर 
 ये बहोत निखरे होते हैं 
मुस्कुराते चेहरे अक्सर खतरनाक होते हैं,
काली अमावस की रात होते हैं.

ईनको भीड़ रास नहीं आती 
ये काफी अकेले होते हैं 
ईनके अपने कुछ 
अलग ही उसूल होते हैं 
मुस्कुराते चेहरे अक्सर खतरनाक  होते हैं,
काली अमावस की रात होते हैं.

इन्हें खुदकी फिक्र नहीं होती 
औरों की होती हैं 
जाने किस गम में ईनकी आंखें रोतीं हैं 
खामोशी से अपनेही जिद पे अड़े होते हैं 
मुस्कुराते चेहरे अक्सर खतरनाक होते हैं,
काली अमावस की रात होते हैं.

Monday, 22 October 2018

जिंदगी

अरमानों का बोझ लिए चल रही है जिंदगी,
जाने किस मोड़ से गुजर रही है जिंदगी।
उम्र भर मेहनत की, हासिल ये मकाम किया,
और किस मकाम की उम्मीद, कर रही है जिंदगी।।

युं तो कहने सुनने को, कई अपने पास है,
हाल-ए-दिल कहने से क्युं, झिझक रही है जिंदगी।
बस झिझक जाने से, अपने दूर हो जाते हैं,
जान-बुझकर रिश्तों को, क्यु बिखर रही है जिंदगी।।

जानते है गुरूर की, इंतेहा मगर फ़िर भी,
जाने किस पे गुरूर, कर रही है जिंदगी।
वो कौन सा चिराग़ है, जला है और बुझा नहीं,
'नवाज़' का कलाम, याद कर रही है जिंदगी।।

Thursday, 11 October 2018

किस्मत

किस्मत ने ली करवट तो क्या क्या नहीं होता,
मगर ये क्यूं होता है के तु मेरा नहीं होता।
मारकर दिल को अपने फ़िर भला हम मुस्कुराइए क्यूं,
और किस मुस्कुराहट पर ज़माने का पहरा नहीं होता।।

तुमने छोड़ा ना ज़माना, और तुम करती भी क्या,
किसी पराये पर यूंही भरोसा नहीं होता।
तुम और मैं, दोनों, हाथ मिलाते रह गए,
काजल आंखों का होता है, नज़र का नहीं होता।।

अल्हड़पन, मासूमियत हम दोनों को ले डूबी,
वक़्त ने कुछ और वक़्त दिया होता तो क्या होता।
तुम सामने आओ और जान लूं की तुम ख़ुश हो,
तुम्हारे दीदार से ज्यादा कोई पल सुनहरा नहीं होता।।

कुछ तो रिश्ता रहा होगा पिछले जनम का तुमसे,
यूंही किसी से रिश्ता कोई गहरा नहीं होता।
किस्मत ने ली करवट तो क्या क्या नहीं होता,
मगर ये क्यूं होता है के तु मेरा नहीं होता।।

Monday, 17 September 2018

वास्ता


जीतकर दुनिया खुदसे हारने के लिए,
मेरा "मैं" ही काफी है, मुझे मारने के लिए।
हसींन शख़्स कोई सर को झुकाये क्यूँ हैं,
ठोकरें मिलती है शख़्सियत निखारने के लिए।।

वो दरख़्त जिनके सर, आसमान में हैं,
मिली है उनको जमीं, तने गाढ़ने के लिए।
गुरुर पंखों पे करके तू चला जा उड़कर, 
अहमियत शाख़ पर घरौंदे की जानने के लिए।।

वो पंछी छोड़ गए है जो अब चमन अपना,
बहार आये तो किसको बहारने के लिए।
मेरा जमीं से वास्ता है, आ गया वापस,
कोई तो आये नजर मेरी उतारने के लिए।।

Sunday, 16 September 2018

मोबाईल


जो मोबाईल जुड़ता गया, रिश्ते टूटते गए,
जब रिश्ते टूटते गए, तो हम भी टूटते गए...

वो रिश्ते जो कभी अपने हुआ करते थे,
सारे खुशियां, सारे गम मिलकर सहा करते थे।
एक एक करके सारे रूठते गए,
सारे रूठते गए तो हम भी टूटते गए।।

कभी तो हम हवाओं को छुआ करते थे,
इन्द्रधनुष से चुराकर रंग, जिंदगी में भरा करते थे।
इन्द्रधनुष के रंग आसमां में छुटते गए,
रंग छुटते गए तो हम भी टूटते गए।।

फुल शाखों के साथ गालों पर भी खिला करते थे,
वो गाल जो खिलखिलाकर हसा करते थे।
खिलखिलाना रुक गया और फुल मिटते गए,
फुल मिटते गए तो हम भी टूटते गए।।

जो मोबाईल जुड़ता गया, रिश्ते टूटते गए,
जब रिश्ते टूटते गए, तो हम भी टूटते गए...

Saturday, 15 September 2018

प्यास



प्यासे रहकर जानिये, ये प्यास क्या है,
मशक्कत के बाद सुकून की आस क्या है।
उम्र भर तलाशता रहा चैन-ओ-सुकून मैं,
जब रुक गया तो जाना तलाश क्या है।।

दुनिया के नक्शे कदम पर चलके कौन खुश रहा,
सब जानते हैं गम की खराश क्या है।
कभी देखकर उदास खुद को मुस्कुराओ तो,
जानलों ख्वाहिशों की लाश क्या है।।

दिन के अंधेरे में जो कभी खो गए थे हम,
जाना उजालें की ये रात क्या है।
मुस्कुराते लोग मिलेंगे जो हर कहीं,
सोचो के छुपाती आंसुओं को वो बात क्या है।।

Thursday, 13 September 2018

रुलाते क्यूँ हो...


जो सुन न सकूँ बात बताते क्यूँ हो 
मेरी जॉ मुझको ऐसे तुम, रुलाते क्यूँ हो।

माना है प्यार बहोत, प्यार का इज़हार भी है,
इश्क़ है जिससे मेरा ऐसा तू यार भी है,
मिटाने तुझ पे अपनी जान हम तैयार भी है,
बेवजह मुझको दिलदार सताते क्यूँ हो,
मेरी जॉ मुझको ऐसे तुम, रुलाते क्यूँ हो।।

ना करो शक मुझपे, के तुमसे दूर हूँ मैं,
मिलना चाहती हूँ, हालात से मज़बूर हूँ मैं,
करो यकीं के सिर्फ़ तुम्हारी ही हूँर हूँ मैं,
हूँर के अपने आसु यूँ बहाते क्यूँ हो,
मेरी जॉ मुझको ऐसे तुम, रुलाते क्यूँ हो।।

जो सुन न सकूँ बात बताते क्यूँ हो 
मेरी जॉ मुझको ऐसे तुम, रुलाते क्यूँ हो...


Wednesday, 12 September 2018

कोवळं प्रेम

लहानपणीची वेणी सैल होते,
केस स्वातंत्र्य पसंत होऊ लागतात।
ढळू नये म्हणून खांद्यावरचा पदर,
हाताने धरून ठेऊ लागतात।।

नव्या नजरा, नव्या भावना,
सारं काहीं नवं असतं।
मनाला गुदगुल्या करणारं, 
आपलं कुणी हवं असतं।।

निर्णय चुकतील की असतील बरोबर 
याचा नसतो काही नेम।
कोवळं मन, कोवळी पालवी,
अन् कोवळं कोवळं प्रेम।।


Wednesday, 5 September 2018

कुत्ता

फिक्र जिनकी की होती है, वो जमात ही कुछ और है,
कुत्ता हूं मैं सड़क का, मेरी बात ही कुछ और है।
गंदा सा रहेता हूं मैं, टुकडों पर पलता हूं,
मेरा दिन कुछ और है, मेरी रात ही कुछ और है।।

ना इंसान बनाओ मुझे की मै गिरना चाहता नहीं,
इंसान धोखेबाज हैं मेरी बात ही कुछ और है।
मुझे मेरे मालिक की जुस्तजू, मुझे मेरी रोटी से प्यार है,
चाहे हिन्दू हो या मुसलमां हो, वो बात ही कुछ और है।।

आज का दिन...

कुछ अच्छा यार तो हो आज के दिन,
बस उनका दीदार तो हो आज के दिन।
उन्हीं के तस्सव्वूर में निकल रहे थे DH से,
वो मुस्कुराए सामने आकर, आज के दिन।।

हो खुदाया गर तेरी यूंही रहेमत,
जिंदगी भर रहे यू आज का दिन।
एक बाकी है इज़हार ए मोहब्बत यारों,
शायद मिल जाए मुझे आज का दिन।।

Monday, 3 September 2018

बहु दिन भए प्रभु...

बहु दिन भए प्रभु, जरा रूप दिखाओ,
या धुन बांसुरी की कोई सुनाओ।
सम्भवामि युगे युगे कहेके चले गए,
बहु युग चले गए हैं प्रभु लौटके आओ।।

बनके सखा जरा यारी सिखाई दो,
करें गोपियों की इज्ज़त ये बताई दो।
या हो कोई पीड़ा परबत बनी हुई,
करंगुली पे अपनी पीड़ा उठाई दो।।

जो लीला आपने रची मिलने सुदामा को,
उस तरह की प्रभु कोई लीला तो दिखाओ।
बहु दिन भए प्रभु, जरा रूप दिखाओ,
या धुन बांसुरी की कोई सुनाओ।।

Thursday, 23 August 2018

बाशिंदा

वो पेड़ों का मैल है, जिसपे तुम जिंदा हो,
क्या पेड़ों के कटने से, जरा भी शर्मिंदा हो।
धरती सहे रही है सब, इसका ना इम्तेहान लो,
मिटा रहे हो जिस धरती को, उसके तुम बाशिंदा हो।।

Monday, 20 August 2018

किसान

सबको खाना देता था, वो कई दिनों से भूखा था,
सुना है एक गांव में, कोई किसान रहेता था,
बेटी की शादी करनी थी, बेटे को भी पढ़ाना था,
गिरवी थे जो बीवी के गहेने भी छुड़वाना था,
इस बार जरूर मिलेगा भाव, हर बार ये कहेता था,
सुना है एक गांव में, कोई किसान रहेता था।

अब खेती की फ़िक्र नहीं, रोटी भी अब रोज मिलेगी,
आत्महत्या कर ली उसने, सरकार "मदत" तो जरुर करेगी,
सुख चुका है अब वो पानी, आंखों में जो बहता था,
सुना है एक गांव में कोई किसान रहता था,
सबको खाना देता था, वो कई दिनों से भूखा था।।

जिंदगी

हम समेटते जायेंगे जब बिखरती जाएगी,
जिंदगी हमारी तो यूंही चलती जाएगी।
गुज़र रहा है वक्त जिस ख़ामोशी से,
ख़ामोश रहे तो उसी तरह जिंदगी गुजरती जाएगी।।

ख़ामोश हैं हम तो है जमाना हमारा यार,
बोलने लगे तो यारी टूटती सी जाएगी।
एक मोहब्बत की शमा दिल में जलाए रक्खे हैं,
इसी तरह तो जिंदगी उजलती जाएगी।।

Sunday, 19 August 2018

जिहाद

सियासत चला पाओगे तुम, ये दिल नहीं मानता,
देश बचा पाओगे तुम, ये दिल नहीं मानता।
संविधान का रास्ता बहुत मुश्किल है तुम्हारे लिए,
इस रास्ते पे चल पाओगे तुम, ये दिल नही मानता।।

तुम्हारी सोच अलग है, तुम्हारे यार-दोस्त अलग,
हमारे साथ रह पाओगे तुम, ये दिल नहीं मानता।
रोटी, कपड़ा और मकान जरूरतें है हमारी,
ये दिला पाओगे तुम? ये दिल नहीं मानता।।

जो पढ़ने लिखने का हक हमसे छीन रहे हो तुम,
हम पढ़ना लिखना छोड़ देंगे ये दिल नहीं मानता।
भीमा ने कहा के पढ़ो, मिलकर जिहाद करो,
भीमा को चुप कराओगे तुम, ये दिल नहीं मानता।।

Thursday, 16 August 2018

सहारा

डूबने वालों को तिनके का सहारा मिल जाए,
तेरे हाथ का नहीं, ना सही, उंगली का सहारा मिल जाए।
इंसान हैं हम, इंसानियत बाकी है अभी,
बस इसका एक इशारा मिल जाए।।


Friday, 10 August 2018

बदल जाते हैं...

रिश्ते बदल जाते हैं, नाते बदल जाते हैं,
वक्त बदलता है तो लोग बदल जाते हैं।
हमको भी ना समझना कोई दुध का धुला,
हो कोई मजबूरी हो तो, हम भी बदल जाते हैं।।

सीखी हैं जहान से जो बातें नई नई,
पैमाने अदब-ओ-हया के, सारे बदल जाते हैं।
पहनते थे कल तक सिल कर फटे कपड़े,
फटे ना हो तो अब कपड़े बदल जाते हैं।।

मजहब ये तेरा मेरा है सियासती खेल,
चलो यारों इंसानों में सारे बदल जाते हैं।
रक्खों ना कोई उम्मीद जमाने को बदलने की,
ख़ुदको बदल के देखो, जमाने बदल जाते हैं।।

Thursday, 9 August 2018

सांवरी...

तेरी जुल्फों से होकर जो हवाएं गुजरती हैं,
बस वही शायरी बनके मेरी कलम से उतरती हैं।
लाज़मी होगा तुझको गुरूर - ए - हुस्न होना,
जो इतनी नजरें तुझपर, चलती हैं, रुकतीं हैं।।

चलना तेरा चमन में, नहीं कोई छोटी बात,
तेरे ही तो पिछे ये बहारें चलती हैं।
सांवरा सा रंग तेरा, तुझसे ही है श्याम,
तेरी ही इजाजत से तो रात उगती ढलती है।।

Wednesday, 8 August 2018

मुश्किल है...

आवाम का सरकार से हाथ मिलाना भी मुश्किल है,
आवाम का सरकार से दूर जाना भी मुश्किल है।
सरकार जब माने है पैसेवालों को सरकार,
आवाम का फिर आवाज़ उठाना भी मुश्किल है।।

पैर है जिस जमीं पर मेरे, वो जमीं मेरी नहीं,
हाथ उठाकर आसमां को, नीचे लाना भी मुश्किल है।
ऐ धरती मां बता क्या हम तेरे बच्चें नहीं,
क्या बच्चों का अपनी मां पे हक जताना भी मुश्किल है।।

Tuesday, 7 August 2018

इंतजाम

कमालिये दुनिया में जितने रिश्ते थे कमाने से,
गुजरते गुजरते गुजर जायेंगे जमाने से।
हसते मुस्कुराते रहते हैं सबके साथ,
वरना हम नहीं हैं कुछ याद आने से।।

हमारे ना होने से, अच्छा ये काम होगा,
खाली मयखाने का, एक जाम होगा।
हसीनाओं का हमसे छूटेगा पिछा,
यारों के कानों को आराम होगा।।

जिंदा हूं तो हूं दिलफेंक मनचला सा,
मरने के बाद मेरा, ना कोई काम होगा।
Notebook, cellphone, बिस्तर मेरे room में रहेंगे,
कब्र में कफ़न से बस, मेरा इंतजाम होगा।।

Wednesday, 1 August 2018

मेरी दुनिया अलग है तुम्हारी दुनिया से...



मेरी दुनिया अलग है तुम्हारी दुनिया से 
क्योंकी, मैं उन लोगों से जुड़ना ज्यादा पसंद करता हूँ 
जो मेरे आस-पास होते हैं, जो मेरे रूबरू होते हैं 
जो जब बात करते है तो सिर्फ लफ्ज ही नहीं,
सिर्फ दिल ही नहीं, पूरी body इस्तेमाल करते हैं 

मेरी दुनिया अलग है तुम्हारी दुनिया से 
क्योंकि, मेरी दुनिया में smiley icon से ज्यादा जरुरी real smile है 
मेरी दुनिया में I love you, facebook की wall पे नहीं रूबरू कहा जाता है 
जहां पे आपको लड़के को शरमाते 
और लड़की का ग़ुलाबी होते देख सकते हैं 

मेरी दुनिया अलग है तुम्हारी दुनिया से 
क्योंकी, मेरी दुनिया में मैं हसीनाओं को आमने-सामने जाकर 
उन्हें ये बताता हूँ की वो कितनी खूबसूरत हैं 
शायद उन हसीनाओं से मेरा फिर वास्ता रहे या न रहे 
उन्हें मैं याद रहूँ ना रहूँ, मुझे वो याद रहे न रहे 

मेरी दुनिया अलग है तुम्हारी दुनिया से 
क्योंकी, मेरी दुनिया में मेरी उदासी को पहचान लिया जाता है 
मेरा यार जो कभी हसता नहीं, वो भी मुझे हसाने के लिए आ जाता है 
मेरी दुनिया में यार की टांग खीचना रस्म होती है 
और हक़ से चाय मांगना brotherhood कहलाता है 

मेरी दुनिया जो भरी है अजीब लोगों से 
मेरी दुनिया जहाँ कोई मुक़म्मल नहीं हैं 
मेरी दुनिया जहां जिंदगी internet की मोहताज नहीं  
मेरी दुनिया जहाँ मोहोब्बत के सिवा कोई आस नहीं 
मेरी दुनिया जहाँ यार गले मिलते है तो धड़कने एक हो जाती हैं 
मेरी दुनिया जहाँ यारी, जिंदगी कहलाती हैं 
मेरी दुनिया अलग है तुम्हारी दुनिया से...

Monday, 30 July 2018

तुम मुझे जानती हो...

ये जानकर अच्छा लगा कि तुम मुझे जानती हो,
मेरा नाम, मेरी शक्ल भीड़ से भी पहेचानती हो।
तुम ऊंचे society, class से आती हो मगर फिर भी,
अंग्रेजी में हुर, परी कहलाती हो मगर फिर भी,
ये जानकर अच्छा लगा कि तुम मुझे जानती हो,
मेरा नाम, मेरी शक्ल भीड़ से भी पहेचानती हो।

Branded चीजें ना पहनने वाले हैं हम मगर फिर भी
Laptop ना होने से CC में वक़्त बिताने वाले हैं हम मगर फिर भी
अंग्रेज़ी फटाफट ना बोलनेवाले हैं हम मगर फिर भी
अपना दिल तपाक से नहीं खोलते हम मगर फिर भी
ये जानकर अच्छा लगा कि तुम मुझे जानती हो,
मेरा नाम, मेरी शक्ल भीड़ से भी पहेचानती हो।

Sunday, 29 July 2018

कैसे बताऊं...

तु मेरे सामने बैठा रहता हैं
और मेरी नजरें तुझे निहार रही होती हैं
तेरे चेहरे का shape मुझे बहोत प्यारा लगता है
तेरी छोटी सी, प्यारी सी आंखें जब सारी दुनिया को देखते हुए मुझपर से गुजरती हैं
तो मुझे कोई ख़ास होने का एहसास होता है
कभी सोचती हूं की तुम्हें बतादूं
की मैं तुम्हें कितना प्यार करती हूं
मगर बता नहीं पाती
कहीं तुम कुछ ग़लत समझकर बात करना ना छोड़ दो
इस बात से डरती हूं
तु मेरे सामने बैठा रहता हैं
और मैं उन पलों में सारी जिंदगी जी लेती हूं
कैसे बताऊं के मैं तुम्हें चाहती हूं
कैसे बताऊं कि मै तुम्हें प्यार करती हूं
कैसे बताऊं...

जहां देखो तुम...

जहां देखो तुम वहां
हम ही नजर आते हैं,
देखो तो कहां कहां
हम ही नजर आते हैं।

शायद ये सच नहीं
बस आपका गुमान है,
आपके ख़्वाबों- खयालों में
बस हम ही नज़र आते हैं।

Saturday, 28 July 2018

हम जीत के आ रहे हैं...

जश्न मनाए की हम जीत के आ रहे हैं,
तालियां बजाए की हम जीत के आ रहे हैं।
Football खेल नहीं अनाड़ियों का,
हमको खिलाड़ी बुलाएं की हम जीत के आ रहे हैं।
शोर मचाएँ के हम जीत के अा रहे हैं,
नाचें गाए के हम जीत के अा रहे हैं।
DH में बने कुछ मिठाई-विठाई,
और, autograph हमसे ले जाएं के हम जीत के अा रहे हैं।

तु मला पाहिले जेव्हा...

तु मला पाहिले जेव्हा 
मी  तुलाच पाहत होतो, 
अन मनात माझ्या छोटे 
घर आपले बांधित होतो| 

तू क्षणभर माझ्या समोरी 
मी आयुष्य जगले होते,
शोधात तुझ्याच मी का 
ही दुनिया फिरलो होतो ?

Thursday, 26 July 2018

जब लड़ता हूँ खुद से...

जब लड़ता हूँ खुद से, 
तब दुनिया से लड़ पाता हूँ
दर्द बहोत सहता हूँ
तभी सुकून बहोत पाता हूँ

मैदान में जैसे एक जंग छिड़ी होती है
सारे ground की नजरें हम पर ही गड़ी होती हैं
हम football लेकर दौड़ रहे होते हैं
सामने opponent की दिवार खड़ी होती है
जी जान लगाकर मैं उनसे भीड़ जाता हूँ
जब लड़ता हूँ खुद से, तब दुनिया से लड़ पाता हूँ


चोट लगती है, बदन छील जाता है
शायद ही किसी नजर में ये आता है
मरहम जख्मों को ठंडा कर जाता है
यारों की वाहवाही लूटके 
तालियों पे मुस्कुराता हूँ
जब लड़ता हूँ खुद से, तब दुनिया से लड़ पाता हूँ


कोई पूछे ये जिंदगी क्या है
धूल मिट्टी में ये ख़ुशी क्या है
जो न समझे मेरे जुनूँ को कभी
मुर्दा उनकी ये जिंदगी क्या है
यहीं बात मैं सबको बतलाता हूँ
जब लड़ता हूँ खुद से, तब दुनिया से लड़ पाता हूँ



Monday, 23 July 2018

हिजाब

शायर को कोई शेर शबाब में मिलता है,
मुझको यार मेरा हिजाब में मिलता है,
जहां पे करता है वो अदा नमाज़,
वहां मेरा रब मुझे ख़्वाब में मिलता है।

Thursday, 19 July 2018

मेरी शरीक-ए-हयात, मेरी जाना...

मेरी शरीक-ए-हयात, मेरी जाना,
रोज की तरह आज भी
तेरा मेरे तसव्वुर में होना
तेरा साथ रहना
तेरा मुझे सहना
मेरी गलत बातों को भी
तेरा सहीं कहना
मुझे फिर मेरी गलती का एहसास दिलाना
गुस्सा हो के दूर बैठू
तो मुझे पास बुलाना
मेरे बेकार से जोक पर
दिल खोल के खिलखिलाना
मैं करूं तारीफ तेरी तो
बस धीमे से शर्माना
ख्याल रखकर मेरा
मुझसे प्यार जताना
हफ्ते भर लंबे
मेरे इंतजार में रहना
हो कोई परेशानी
किसी से ना कहना
तारीफ में तुम्हारी
लफ्ज़ मेरे कम है
तुम से ही जिंदगी में मेरी
बहार का मौसम है
मेरी जिंदगी में होने का बहुत-बहुत शुक्रिया,
मेरी जिंदगी में होने का बहुत-बहुत शुक्रिया।

हबीब

मैं उसके ख़यालों  मेँ  जाग रहा हूँ,
और वो मेरी नींद लिए सो रही हैं।
मेरे ख्वाब में नहीं, उसीके ही सही, 
क्या हम में कोई गुफ़्तगू हो रही हैं।
गुजर रही है रात, वक़्त गुजर रहा है,
तू मेरे करीब, और करीब हो रही है।
होंगे रूबरू तो, ये इजहार करेंगे,
ऐ हुस्नवाली मेरी, हबीब हो रही हैं।

Wednesday, 18 July 2018

मेरे देश को सोने की चिड़िया बताया जाता है...

मेरे देश को सोने की चिड़िया बताया जाता है
हाँ, दुनियाभर में यही डंका बजाया जाता है
फिर धर्म, जात, प्रांत के नाम पर 
भाईचारे को आजमाया जाता है 
सोच समझकर देश में 
नफरत को फैलाया जाता है 
भीड़ के बिच से कोई उठकर 
सब पता होने का दावा करता है 
बुझी हुई नफरत की आग को
वो शिदद्त से हवा करता है 
उसकी बात सुननेवाले 
वो उसके भक्त होते हैं 
झूटी संस्कृति बचाने के लिए
वो बड़े ही सख्त होते हैं 
जो इनका विरोध करता है 
वो बेमौत मारा जाता है 
कोई कर लेता है आत्महत्या 
तो कोई हॉस्टल से ही गायब हो जाता है 
अगर कोई इनको संविधान याद दिला जाता है 
अंध भक्तो के लिए वो देशद्रोही कहलाया जाता है
मेरे देश को सोने की चिड़िया बताया जाता है
हाँ, दुनियाभर में यही डंका बजाया जाता है

लफ्ज बरस जाते है!

अजान से भी मीठे लफ्जो से
अम्मी सुबह जागाती है,
तब जाकर मेरी सुबह
रोशन हो जाती है!

वो झगडालु लफ्ज बहन के
जब मुझको याद आते है,
शोर मे भी कान मेरे
सुने सुने हो जाते है!

अब्बा के लफ्जो मे मुझको
दिखता है बुढापे का साया,
घर जाता हु तो कहते है,
“बेटा, बहोत दिनो बाद आया!

जब कभी मुझको
ये लफ्ज याद आते है,
आखों से बनके आसू
वो सारे बरस जाते है!

Good bad


Nothing is good, nothing is bad,
Why are the things, making you sad,
Why are you, feeling alone,
When whole world, is your home,
Smile on lips, love in the heart
Talk less and behave smart,
Remember these words my dear mad,
Nothing is good, nothing is bad.

Monday, 16 July 2018

गर्मी

क्या आग को भी कभी सर्दी लगती होगी,
देखके तुझको ये सवाल आता है।
मे अपने ही बेखुदी में खो जाता हूं,
दिल में मेरे ये कैसा खयाल आता है।

Wednesday, 11 July 2018

जुल्फें संवार रहे थे...

कुछ इस तरह हम वक़्त गुजार रहे थे,
ख़ामोशी से बस तुम्हें पुकार रहे थे।
दिल की मेरे शिद्दत तो देखिये,
पास ही आप जुल्फें संवार रहे थे।।

इंतज़ार...

रहेता है आपका इंतजार, आप दिखाई नहीं देती,
होता हूँ हर वक़्त बेक़रार, आप दिखाई नहीं देती|
देर तक बैठा रहता हूँ चौरस्ते पर आपके इंतजार में,
दुनिया दिखाई देती है, मगर आप, दिखाई नहीं देतीं|

सपनों में आती हो तुम...


ये नजरे, दो जाम, नजरों से पिलाती तुम,
वो जुल्फें, जैसे खुशबु, और समां महकाती तुम,
वो मुस्कान, जैसे बहार, और बहार लाती तुम,
ये रात, मेरे सपने, और सपने में आती तुम... 

खयाल


धुप तुजपर पड़ती है,
बदन मेरा जलता है| 
आज-कल  तेरा खयाल रखना,
मुझको अच्छा लगता है|

वक्त ही कितना लगता है...

ये माना के प्यार हुआ नहीं है हमें,
मगर प्यार होने में वक्त ही कितना लगता है 
एक बार हमें देख लो, जैसे कोई जाम थाम रही हो,
फिर चाहे मोड़ देना नजरें, जैसे कुछ हुआ ही न हो,
ईतना करने में वक्त ही कितना लगता है

कभी अपनी जुल्फों को खोल देना,
और महकने देना हवाओं को
अगर कोई महसूस कर ले,
तो वो दीवाना हो जाए आप के प्यार में,
दीवाना होने में वक्त ही कितना लगता है

Saturday, 7 July 2018

शाम

वो शाम जो तेरे साथ गुज़री,
उम्र भर याद रहेगी ।
उस वक्त तक अपना दिल भी,
कभी अपना हुआ करता था ।