आ के रुकती है लब पे बात क्या कहें, हम आप को अपने जज़्बात क्या कहें...
जहां देखो तुम वहां हम ही नजर आते हैं, देखो तो कहां कहां हम ही नजर आते हैं।
शायद ये सच नहीं बस आपका गुमान है, आपके ख़्वाबों- खयालों में बस हम ही नज़र आते हैं।
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