तेरे गम तेरे गिले तेरे शिकवे,
सुनने की फुरसत निकाल लूंगा,
तू मिल कभी मुहब्बत की राह पर,
मिलने की फुरसत निकाल लूंगा।
अकेली रहती है, ये तो कोई बात नहीं,
दुकेली रह, मै फुरसत निकाल लूंगा।।
तेरे रूप की है बात तो तू सोच भी मत,
मेहताब मैं कई सारे तुझसे निकाल लूंगा।
तू गुमसुम, चुप जो रहेती है,
मै बात कोई तुझसे निकाल ही लूंगा।।
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