Thursday, 19 July 2018

मेरी शरीक-ए-हयात, मेरी जाना...

मेरी शरीक-ए-हयात, मेरी जाना,
रोज की तरह आज भी
तेरा मेरे तसव्वुर में होना
तेरा साथ रहना
तेरा मुझे सहना
मेरी गलत बातों को भी
तेरा सहीं कहना
मुझे फिर मेरी गलती का एहसास दिलाना
गुस्सा हो के दूर बैठू
तो मुझे पास बुलाना
मेरे बेकार से जोक पर
दिल खोल के खिलखिलाना
मैं करूं तारीफ तेरी तो
बस धीमे से शर्माना
ख्याल रखकर मेरा
मुझसे प्यार जताना
हफ्ते भर लंबे
मेरे इंतजार में रहना
हो कोई परेशानी
किसी से ना कहना
तारीफ में तुम्हारी
लफ्ज़ मेरे कम है
तुम से ही जिंदगी में मेरी
बहार का मौसम है
मेरी जिंदगी में होने का बहुत-बहुत शुक्रिया,
मेरी जिंदगी में होने का बहुत-बहुत शुक्रिया।

No comments:

Post a Comment