सर पे अपने कफ़न है, हथेली पे जान है,
कदमों तले जमाना रखने का अरमान है।
जिंदगी जीते है अपने ही शर्तों पे,
कभी कभी लगता है की अपुन ही भगवान है।।
डरने वालों को डराती है ये दुनिया,
अच्छे लोगों को सताती है ये दुनिया।
दुनियादारी से अपनी पुरानी पहेचान है,
कभी कभी लगता है की अपुन ही भगवान है।।
झगड के दुनिया से जो यार पा लिया,
कर्म ही कुछ ऐसे के उसको गवॉ दिया।
बसा रहे हैं दुनियॉ जो विरान है,
कभी कभी लगता है की अपुन ही भगवान है।।
नास्तिक भी हुए, भगवान पे भरोसा भी किया,
घंटा भगवान को फर्क नहीं पड़ता, ये जान भी लिया।
हम ही भगवान है, यही हमारी पहेचान है,
कभी कभी लगता है की अपुन ही भगवान है।।
जब सितारों में लौट के जायेंगे अपुन,
हटाकर सुरज खुद जगमगाएंगे अपुन।
हर जगह चमकना अपनी शान है,
कभी कभी लगता है की अपुन ही भगवान है।।
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