Thursday, 19 July 2018

हबीब

मैं उसके ख़यालों  मेँ  जाग रहा हूँ,
और वो मेरी नींद लिए सो रही हैं।
मेरे ख्वाब में नहीं, उसीके ही सही, 
क्या हम में कोई गुफ़्तगू हो रही हैं।
गुजर रही है रात, वक़्त गुजर रहा है,
तू मेरे करीब, और करीब हो रही है।
होंगे रूबरू तो, ये इजहार करेंगे,
ऐ हुस्नवाली मेरी, हबीब हो रही हैं।

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