Sunday, 16 September 2018

मोबाईल


जो मोबाईल जुड़ता गया, रिश्ते टूटते गए,
जब रिश्ते टूटते गए, तो हम भी टूटते गए...

वो रिश्ते जो कभी अपने हुआ करते थे,
सारे खुशियां, सारे गम मिलकर सहा करते थे।
एक एक करके सारे रूठते गए,
सारे रूठते गए तो हम भी टूटते गए।।

कभी तो हम हवाओं को छुआ करते थे,
इन्द्रधनुष से चुराकर रंग, जिंदगी में भरा करते थे।
इन्द्रधनुष के रंग आसमां में छुटते गए,
रंग छुटते गए तो हम भी टूटते गए।।

फुल शाखों के साथ गालों पर भी खिला करते थे,
वो गाल जो खिलखिलाकर हसा करते थे।
खिलखिलाना रुक गया और फुल मिटते गए,
फुल मिटते गए तो हम भी टूटते गए।।

जो मोबाईल जुड़ता गया, रिश्ते टूटते गए,
जब रिश्ते टूटते गए, तो हम भी टूटते गए...

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