तुझे प्यार करूं या ना करूं, बड़ी उलझन में हूं,
चाहत पा लूं या पेट भरूं, बड़ी उलझन में हूं।
सुना था पैसा तो हाथों का मैल होता है,
हाथ कहां मैले करूं, बड़ी उलझन में हूं।।
यूं तो नहीं है सीधा, रस्ता ये दुनियादारी का,
कैसे टेढ़ा रस्ता चलूं, बड़ी उलझन में हूं।
कदम कदम पर नफ़्स को उकसाने वाली चीजें हैं,
कैसे ईनका सामना करूं, बड़ी उलझन में हूं।।
जिंदा लाश बने रहेना, जमाने को पसंद तो है,
मैं जिंदा रहूं या लाश बनूं, बड़ी उलझन में हूं।
जमाने का जहन देखो, बस नफ़रत ही नफ़रत है,
मेरे दिल की मोहब्बत क्या करूं, बड़ी उलझन में हूं।।
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