जानता था, ये कभी ना कभी होना था,
फासला ज्यादा होना था, रास्ता जुदा होना था।
लेकिन ये नहीं पता था के रास्ते फिर मिलेंगे,
हम, जो इक दूजे के बस कॉल की ही उम्मीद कर सकते थे,
अचानक इक दूजे के रूबरू होंगे,
जैसे हम मिलना चाहते हो, जैसे कोई मिलाना चाहता हो,
लेकिन अब मै वो मैं नहीं रहा, ना ही तुम वही तुम हो,
पहले मै तुम्हें देखता तो तुम्हारी ओर दौड़ा चला आता,
तुम भी मेरी बातों पर खिलखिलाकर हस देती,
लेकिन अब ऐसा कुछ नहीं होता,
हां, तुम्हे देखकर मेरी आंखों में चमक अा तो जाती है,
और मुझे देखकर तुम दूर से ही मुस्कुराती हो,
लेकिन अब मै वो मैं नहीं रहा, ना ही तुम वही तुम हो,
और ना मैं तुम्हारे साथ हूं, ना तुम मेरे साथ हो,
ख़ैर, ये कभी ना कभी होना था,
फासला ज्यादा होना था, रास्ता जुदा होना था...
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