रिश्ते बदल जाते हैं, नाते बदल जाते हैं,
वक्त बदलता है तो लोग बदल जाते हैं।
हमको भी ना समझना कोई दुध का धुला,
हो कोई मजबूरी हो तो, हम भी बदल जाते हैं।।
सीखी हैं जहान से जो बातें नई नई,
पैमाने अदब-ओ-हया के, सारे बदल जाते हैं।
पहनते थे कल तक सिल कर फटे कपड़े,
फटे ना हो तो अब कपड़े बदल जाते हैं।।
मजहब ये तेरा मेरा है सियासती खेल,
चलो यारों इंसानों में सारे बदल जाते हैं।
रक्खों ना कोई उम्मीद जमाने को बदलने की,
ख़ुदको बदल के देखो, जमाने बदल जाते हैं।।
No comments:
Post a Comment