Monday, 20 August 2018

किसान

सबको खाना देता था, वो कई दिनों से भूखा था,
सुना है एक गांव में, कोई किसान रहेता था,
बेटी की शादी करनी थी, बेटे को भी पढ़ाना था,
गिरवी थे जो बीवी के गहेने भी छुड़वाना था,
इस बार जरूर मिलेगा भाव, हर बार ये कहेता था,
सुना है एक गांव में, कोई किसान रहेता था।

अब खेती की फ़िक्र नहीं, रोटी भी अब रोज मिलेगी,
आत्महत्या कर ली उसने, सरकार "मदत" तो जरुर करेगी,
सुख चुका है अब वो पानी, आंखों में जो बहता था,
सुना है एक गांव में कोई किसान रहता था,
सबको खाना देता था, वो कई दिनों से भूखा था।।

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