बहु दिन भए प्रभु, जरा रूप दिखाओ,
या धुन बांसुरी की कोई सुनाओ।
सम्भवामि युगे युगे कहेके चले गए,
बहु युग चले गए हैं प्रभु लौटके आओ।।
बनके सखा जरा यारी सिखाई दो,
करें गोपियों की इज्ज़त ये बताई दो।
या हो कोई पीड़ा परबत बनी हुई,
करंगुली पे अपनी पीड़ा उठाई दो।।
जो लीला आपने रची मिलने सुदामा को,
उस तरह की प्रभु कोई लीला तो दिखाओ।
बहु दिन भए प्रभु, जरा रूप दिखाओ,
या धुन बांसुरी की कोई सुनाओ।।
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