Sunday, 19 August 2018

जिहाद

सियासत चला पाओगे तुम, ये दिल नहीं मानता,
देश बचा पाओगे तुम, ये दिल नहीं मानता।
संविधान का रास्ता बहुत मुश्किल है तुम्हारे लिए,
इस रास्ते पे चल पाओगे तुम, ये दिल नही मानता।।

तुम्हारी सोच अलग है, तुम्हारे यार-दोस्त अलग,
हमारे साथ रह पाओगे तुम, ये दिल नहीं मानता।
रोटी, कपड़ा और मकान जरूरतें है हमारी,
ये दिला पाओगे तुम? ये दिल नहीं मानता।।

जो पढ़ने लिखने का हक हमसे छीन रहे हो तुम,
हम पढ़ना लिखना छोड़ देंगे ये दिल नहीं मानता।
भीमा ने कहा के पढ़ो, मिलकर जिहाद करो,
भीमा को चुप कराओगे तुम, ये दिल नहीं मानता।।

No comments:

Post a Comment