Jajbat
आ के रुकती है लब पे बात क्या कहें, हम आप को अपने जज़्बात क्या कहें...
Wednesday, 11 July 2018
जुल्फें संवार रहे थे...
कुछ इस तरह हम वक़्त गुजार रहे थे,
ख़ामोशी से बस तुम्हें पुकार रहे थे।
दिल की मेरे शिद्दत तो देखिये,
पास ही आप जुल्फें संवार रहे थे।।
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