Thursday, 9 August 2018

सांवरी...

तेरी जुल्फों से होकर जो हवाएं गुजरती हैं,
बस वही शायरी बनके मेरी कलम से उतरती हैं।
लाज़मी होगा तुझको गुरूर - ए - हुस्न होना,
जो इतनी नजरें तुझपर, चलती हैं, रुकतीं हैं।।

चलना तेरा चमन में, नहीं कोई छोटी बात,
तेरे ही तो पिछे ये बहारें चलती हैं।
सांवरा सा रंग तेरा, तुझसे ही है श्याम,
तेरी ही इजाजत से तो रात उगती ढलती है।।

No comments:

Post a Comment