बनके अाईना हम जिनसे मिलते हैं,
वो लोग हमसे नफरत सी करते हैं।
अपनी तो बेबाक जिंदगी है बहोत,
हम कहां टूटने से डरते हैं।।
राह-ए-अदब की चलते हुए,
बस शराफत को दिल में रखते हैं।
अकीदत है तो है बस उर्दू पे,
जमाने से बगावत का हुनर रखते हैं।।
उतनी औकात जमाने की अब रही ही नहीं,
सोचा साझा कोई खयाल करते हैं।
हैं कुछ यार, हमें देख मुस्कुराते हैं,
शामें कुछ उनके संग गुजार करते हैं।।
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