Thursday, 13 September 2018

रुलाते क्यूँ हो...


जो सुन न सकूँ बात बताते क्यूँ हो 
मेरी जॉ मुझको ऐसे तुम, रुलाते क्यूँ हो।

माना है प्यार बहोत, प्यार का इज़हार भी है,
इश्क़ है जिससे मेरा ऐसा तू यार भी है,
मिटाने तुझ पे अपनी जान हम तैयार भी है,
बेवजह मुझको दिलदार सताते क्यूँ हो,
मेरी जॉ मुझको ऐसे तुम, रुलाते क्यूँ हो।।

ना करो शक मुझपे, के तुमसे दूर हूँ मैं,
मिलना चाहती हूँ, हालात से मज़बूर हूँ मैं,
करो यकीं के सिर्फ़ तुम्हारी ही हूँर हूँ मैं,
हूँर के अपने आसु यूँ बहाते क्यूँ हो,
मेरी जॉ मुझको ऐसे तुम, रुलाते क्यूँ हो।।

जो सुन न सकूँ बात बताते क्यूँ हो 
मेरी जॉ मुझको ऐसे तुम, रुलाते क्यूँ हो...


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