महेमां आकर चले गए तब ख़ाली हो गया घर,
धड़कन दिल की सुनाई दी, जब ख़ाली हो गया घर।
दो दिन लगा जैसे पल भर में ही गुजर गए,
पल सदियों सा लगने लगा, जब ख़ाली हो गया घर।।
आदत हुई थी पहेले हमको, तनहा तनहा रहेने की,
आदत टूटी पता चला जब ख़ाली हो गया घर।
बच्चे थे, शोर था, घर में रौनक लगती थी,
रौनक आकर चली गई, जब ख़ाली हो गया घर।।
जब महेमां थे घर में तो, लब पे थी मुस्कान बड़ी,
आसू अा गए आंखों में जब ख़ाली हो गया घर।
हसता खिलखिलाता घर, घर जैसा लगता था,
बस मकान रह गया, जब ख़ाली हो गया घर।।
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