आ के रुकती है लब पे बात क्या कहें, हम आप को अपने जज़्बात क्या कहें...
शायर को कोई शेर शबाब में मिलता है, मुझको यार मेरा हिजाब में मिलता है, जहां पे करता है वो अदा नमाज़, वहां मेरा रब मुझे ख़्वाब में मिलता है।
mast
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