Saturday, 12 January 2019

सब में एक हैं, एक में सब

 सब में एक हैं, एक में सब,
 हम ये सब जाने कब।
 धर्म जात पे लड़ रहे हैं,
 इन्सा को पहेचाने कब।।

कुछ पत्थर के बन बैठे हैं, 
कुछ तो दिखते भी नहीं।
नाम पे जिनके लड़ रहे हैं,
इन्सा गोरे काले सब।।

वो काफिर है रहेमत से तो,
मैं भी काफिर हो जाऊं।
बंद कर दूं मंदिर मस्जिद,
लगा दूं इनपे ताले सब।।

अपनी बात नहीं बतलाते,
औरों की बतलाते हैं।
काला दिल लिए बैठे हैं,
खोटी नियत वाले सब।।

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