तुने उसको दिल था सौपा,
दिल पे उसने वार किया।
तुने जब उसको ठुकराया,
उसने तुझको प्यार किया।।
नर्म शीशा था दिल तेरा,
तोड कर बेकार किया।
दुनिया की नजरों में फिर,
तुझको गुन्हागार किया।।
तु थी इन्सा, पहले से ही,
हुकूक तुझको मिलने थे।
देके तेरे हुकूक तुझको,
तुझ पर फिर उपकार किया।।
रब ही जाने, रब ने तुझको,
किस मिट्टी का बनाया है।
उसकी सजा का दिन जब आया,
तुने दिन इतवार किया।।
दिल पे उसने वार किया।
तुने जब उसको ठुकराया,
उसने तुझको प्यार किया।।
नर्म शीशा था दिल तेरा,
तोड कर बेकार किया।
दुनिया की नजरों में फिर,
तुझको गुन्हागार किया।।
तु थी इन्सा, पहले से ही,
हुकूक तुझको मिलने थे।
देके तेरे हुकूक तुझको,
तुझ पर फिर उपकार किया।।
रब ही जाने, रब ने तुझको,
किस मिट्टी का बनाया है।
उसकी सजा का दिन जब आया,
तुने दिन इतवार किया।।
No comments:
Post a Comment