Friday, 2 August 2019

मौत का इजहार...

मौत का इजहार किया है कभी?
नहीं, तो फिर करके देखो,
खयालों में ही सही,
एक बार मर के देखो,
अच्छा लगेगा।

अच्छा लगेगा,
जब सांसे रफ्ता रफ्ता बोझिल हो जाएंगी,
सांस लेना मेहनत का काम मालूम होगा,
आंखों के सामने जो नजारा होगा,
वो भी धुंधलाता जाएगा,
दिल का धड़कना कम होते होते रुक सा जाएगा,
आप महसूस करोगे आप के रगों में दौड़ते हुए खून को,
जो धीरे धीरे ठहर रहा होगा,
और आप को हल्का हल्का सुनाई दे रहा होगा,
लोगों का रोना।

जो रो रहे होंगे उनका शुक्रिया अदा करें,
उस से ज्यादा वो कुछ कर भी नहीं सकते,
उनका भी शुक्रिया करें जो आप को,
आप की मंजिल तक पहुंचाने वाले हैं,

आप को पता भी नहीं चलेगा की,
कब आप का बदन ठंडा पड़ गया,
आप को बड़े प्यार से आप के चाहनेवाले घुस्ल देंगे,
आप को अल्लाह के दरबार में पेश होने के लिए,
साफ शफ़्फ़ाक कफन पहनाया जाएगा,
सूरमा, इत्तर लगाया जाएगा,
और फिर,
शुरू होगा आपका आखरी सफर,
कब्रस्तान तक,
रास्ते में आपको कई जाने अनजाने लोग मिलेंगे,
वैसे ही जैसे जिंदगी में मिले थे,
सब को मोहब्बत से अलविदा कहीयेगा,
आप कब्रस्तान पहुंच जाएंगे,
आप के लिए नमाज - ए - जनाजा, आखरी दुआ,
दरूद-ओ-शरीफ पढा जा रहा होगा,
आप को प्यार करनेवाले
अपने हाथों से आप को मिट्टी के हवाले करेंगे,
आप को कब्र में रखा गया होगा,
आप को आप पर पड़ रहे मिट्टी की आवाज सुनाई देगी,
फिर उनके कदमों की आवाज जो,
इस से आगे आप के साथ नहीं आ सकते,
और इस तरह एक खेल खतम हो जाएगा,
शायद किसी और खेल के शुरू होने के लिए,

अब अपने खयालों से बाहर आईये,
और सोचिये,
आप क्यू जी रहे हैं?

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