जिंदगी आमादा जिए जाने को,
उसपे है याद तेरी सताने को।
खो कर सब तुझको जो पा लिया,
और क्या रह गया है पाने को।।
तेरी आदत सी हो गई है अब,
जान दे दूं क्या ये छुडाने को।
मर भी जाऊं तो रूह भटकेगी,
लौट आएगी सनम खाने को।।
भरी महफिल में नाम लेके तेरा,
हुए मशहूर हर जमाने को।
कोई पूछे के कहाॅ चलें हैं 'वसीम',
चलें जहान-ए-'झुबेदा' बसाने को।।
उसपे है याद तेरी सताने को।
खो कर सब तुझको जो पा लिया,
और क्या रह गया है पाने को।।
तेरी आदत सी हो गई है अब,
जान दे दूं क्या ये छुडाने को।
मर भी जाऊं तो रूह भटकेगी,
लौट आएगी सनम खाने को।।
भरी महफिल में नाम लेके तेरा,
हुए मशहूर हर जमाने को।
कोई पूछे के कहाॅ चलें हैं 'वसीम',
चलें जहान-ए-'झुबेदा' बसाने को।।
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