Thursday, 18 July 2019

धुआं

मेरे अंदर भी धुआं है,
मेरे बाहर भी धुआं।
धुंधले धुंधले रास्ते है,
मंजिले भी है धुआं।।

बाप ने सोचा था मेरे,
बन के सूरज आऊंगा।
ये गरीबी का अंधेरा,
दूर मै कर पाऊंगा।
कैफ का ग्रहण लगा की,
कुछ ना दिखता, बस धुआं।
मेरे अंदर भी धुआं है,
मेरे बाहर भी धुआं।।

यार कोई मेरा जो,
मुझको बुलाए प्यार से।
बात धुए की निकाले,
रद्दी के अखबार से।।
पाता हूं खुदको अकेला,
छट जो जाता है धुआं।
मेरे अंदर भी धुआं है,
मेरे बाहर भी धुआं।।

है गुरूर -ए- मिट्टी मुझको,
मिट्टी में मिल जाऊंगा।
पर रहूंगा जिंदा जब तक,
मै धुआं बन जाऊंगा।।
लेके जाएगी हवा,
जैसे गुबारे इक धुआं।
मेरे अंदर भी धुआं है,
मेरे बाहर भी धुआं।।

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