सुबह को मैंने आंखें खोली,
खिड़की से एक चिड़िया बोली,
देख ले बाहर जा कर बंदे,
रात में कुछ है बारिश हो ली,
मैंने बाहर जाकर देखा,
सारे खुश थे धरती गीली,
सर्द हवा थी, रूत भी जवाॅ थी,
मैं वापस बिस्तर पर लौटा,
मैंने फिर तकिए को देखा,
आंसू से वो भी था गीला,
मैं जब वजह सोचने बैठा,
कान में तेरी दूरी बोली,
"बस बहुत, अब मिलने आओ,
दिल को मेरे ना तड़पाओ,
साथ तुम्हारा मैं जो पा लूं,
बारिश में मैं भी तो न्हा लूं,"
मैंने फिर बाहर को देखा,
खूबसूरत एक नजारा,
सारा नजारा धुंधला हो गया,
हो गई थी आंखें जो गीली...
खिड़की से एक चिड़िया बोली,
देख ले बाहर जा कर बंदे,
रात में कुछ है बारिश हो ली,
मैंने बाहर जाकर देखा,
सारे खुश थे धरती गीली,
सर्द हवा थी, रूत भी जवाॅ थी,
मैं वापस बिस्तर पर लौटा,
मैंने फिर तकिए को देखा,
आंसू से वो भी था गीला,
मैं जब वजह सोचने बैठा,
कान में तेरी दूरी बोली,
"बस बहुत, अब मिलने आओ,
दिल को मेरे ना तड़पाओ,
साथ तुम्हारा मैं जो पा लूं,
बारिश में मैं भी तो न्हा लूं,"
मैंने फिर बाहर को देखा,
खूबसूरत एक नजारा,
सारा नजारा धुंधला हो गया,
हो गई थी आंखें जो गीली...
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