मुझे हक नहीं है, यारों जीने का,
यारों मुझको अब, मर जाना चाहिए।
या बांध के खुद को किसी बडे धर्म से,
मुझे धरम का गुलाम, हो जाना चाहिए।।
किसी और का वजूद नहीं, बस मेरा धरम
सारे जमाने को ये समझाना चाहिए।
धर्म के नाम पर, धर्म को तोडकर,
इक नया धर्म हमको बनाना चाहिए।।
कोई जहां में हो तो मेरे धरम का हो,
जात पात सबको समझाना चाहिए।
मेरे धरम का हो तो मुझसे भी छोटा हो,
जात का टाईम बाॅम लगाना चाहिए।।
मेरे धरम में हो भले लाख बुराई,
औरों को शीशा हर पल दिखलाना चाहिए।
यारों की अच्छाई में फायदा यही तो है,
नाजायज फायदा उठाना चाहिए।।
फर्क कोई झूट और सच में ना रहे,
बातों को इस तरह उलझाना चाहिए।
तोडना हो सच तो बस इतना ही करें,
चौथा स्तंभ तोडना, मिटाना चाहिए।।
जो तैरती जाती हैं बहाव के खिलाफ,
वो मछलियां जाल में फंसाना चाहिए।
बचना, ना देख ले हमको कहीं ' रवीश '
उजाले में हमको नहीं आना चाहिए।।
यारों मुझको अब, मर जाना चाहिए।
या बांध के खुद को किसी बडे धर्म से,
मुझे धरम का गुलाम, हो जाना चाहिए।।
किसी और का वजूद नहीं, बस मेरा धरम
सारे जमाने को ये समझाना चाहिए।
धर्म के नाम पर, धर्म को तोडकर,
इक नया धर्म हमको बनाना चाहिए।।
कोई जहां में हो तो मेरे धरम का हो,
जात पात सबको समझाना चाहिए।
मेरे धरम का हो तो मुझसे भी छोटा हो,
जात का टाईम बाॅम लगाना चाहिए।।
मेरे धरम में हो भले लाख बुराई,
औरों को शीशा हर पल दिखलाना चाहिए।
यारों की अच्छाई में फायदा यही तो है,
नाजायज फायदा उठाना चाहिए।।
फर्क कोई झूट और सच में ना रहे,
बातों को इस तरह उलझाना चाहिए।
तोडना हो सच तो बस इतना ही करें,
चौथा स्तंभ तोडना, मिटाना चाहिए।।
जो तैरती जाती हैं बहाव के खिलाफ,
वो मछलियां जाल में फंसाना चाहिए।
बचना, ना देख ले हमको कहीं ' रवीश '
उजाले में हमको नहीं आना चाहिए।।
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