Friday, 26 July 2019

हसते हुए

हसते हुए जागता है,
हसते हुए सो लेता है।
कितनी आसानी से वो
जिंदगी के साथ हो लेता है।।

हालात से लडने की,
ये तरकीब निकाली है।
हर हालात में वो बस,
हलकेसे मुस्कुरा देता है।।

सुना है उसकी आंखों में
कभी आसू नहीं दिखते।
वो अपनी आंखे,
पानी से ही धो लेता है।।

वो मशहूर है अपनी,
खुशमिजाजी के लिए।
सारे गम हंसी की,
चादर में छुपो लेता है।।

इक सुबह उसका,
तकिया मिला गीला।
पता चला वो रातों में,
जी भर के रो लेता है।।

अक्शा

जुल्फों को झटक कर तेरा बांध लेना,
धीरे से रात का सुबह होना।
वो मंजर तेरे दीदार का,
नामुमकिन है लफ़्ज़ों में बयाॅ होना।।
मेरे इस दिल से पूछो,
सुनने को जो तरसता है।
बातों से किसी की यूं,
बचपन का गुमाॅ होना।।
ये मासूमियत ही है,
'अक्शा' जो मिली है तुझको।
शायद ही देखा होना,
शायद ही सुना होना।।

Monday, 22 July 2019

दूरी सही ना जाए

दूरी सही ना जाए,
तेरे बिना मुझको,
कुछ और नजर ना आए,

दूरी सही ना जाए,
तेरे बिना मुझको,
कुछ और नजर ना आए,
दूरी सही ना जाए।

कभी सोचा नहीं पहले
के दिन यूं भी बदलेंगे
तुम हो जाओगी दूर हमसे
और हम यूं तड़पेंगे
दूरी सही ना जाए,
तेरे बिना मुझको,
कुछ और नजर ना आए,
दूरी सही ना जाए।

ये जो ऊंची पहाड़े हैं
हर पल तुमको याद करें
और इन पहाड़ों के संग हम
रब से यह फरियाद करें
दूरी सही ना जाए,
तेरे बिना मुझको,
कुछ और नजर ना आए,
दूरी सही ना जाए।

(जाजाई सिंग्सित के "तोल्थिंग सेहेई नहि" की धुन से मुतासिर)

Thursday, 18 July 2019

धुआं

मेरे अंदर भी धुआं है,
मेरे बाहर भी धुआं।
धुंधले धुंधले रास्ते है,
मंजिले भी है धुआं।।

बाप ने सोचा था मेरे,
बन के सूरज आऊंगा।
ये गरीबी का अंधेरा,
दूर मै कर पाऊंगा।
कैफ का ग्रहण लगा की,
कुछ ना दिखता, बस धुआं।
मेरे अंदर भी धुआं है,
मेरे बाहर भी धुआं।।

यार कोई मेरा जो,
मुझको बुलाए प्यार से।
बात धुए की निकाले,
रद्दी के अखबार से।।
पाता हूं खुदको अकेला,
छट जो जाता है धुआं।
मेरे अंदर भी धुआं है,
मेरे बाहर भी धुआं।।

है गुरूर -ए- मिट्टी मुझको,
मिट्टी में मिल जाऊंगा।
पर रहूंगा जिंदा जब तक,
मै धुआं बन जाऊंगा।।
लेके जाएगी हवा,
जैसे गुबारे इक धुआं।
मेरे अंदर भी धुआं है,
मेरे बाहर भी धुआं।।

Tuesday, 16 July 2019

चू तिया पा ना पाया करो...

मै इस धरम का, तू उस धरम का,
स्यापा ना पाया करो हाय, स्यापा ना पाया करो।
धरम स्थल जाना, तो आपेही जाओ,
इत्थे ना आया करो हाय, इत्थे ना आया करो।।

मेरा धरम है सबसे नियारा,
सबसे प्यारा, सबसे नियारा,
चू तिया पा ना पाया करो हाय, चू तिया पा ना पाया करो...
स्यापा ना पाया करो...

कोई तुम्हें आके उल्लू बनाए,
झगड़ा लगाए, दंगे कराए,
बहेक ना जाया करो हाय, बहेक ना जाया करो।
स्यापा ना पाया करो...

धरती है सबकी, संग संग है रहना,
अपने ही रस्ते है सबको ही चलना,
नफरत ना पाया करो हाय, नफरत ना पाया करो।
चू तिया पा ना पाया करो...
स्यापा ना पाया करो हाय, स्यापा ना पाया करो...

Monday, 15 July 2019

वो दोनों

वो दोनों, साथ नहीं रहते हैं, मगर फिर भी,
मैंने देखा है दोनों को गले मिलते हुए।
रात, सुबह गले मिल के चली जाती है,
दिन, शाम गले मिल के चला जाता है।।

मैं सुबह शाम, जब भी इनको, देखता हूं,
कोई अपना सा मुझको याद आ जाता है।
हम भी है दूर, साथ नहीं है फिर भी,
जब भी मिलते हैं, हम भी गले मिलते हैं।।

वो दोनों, साथ नहीं रहते हैं, मगर फिर भी,
मैंने देखा है दोनों को गले मिलते हुए...

Saturday, 13 July 2019

जाने कितने वसीम हैं मुझमें

जाने कितने वसीम हैं मुझमें,
मै कितना अजीब सा हूं।
साथ में खुद के बचपन से हूं,
खुद को ढूंढता रहता हूं।।

वो वसीम जो नादाॅ है,
गया नहीं लडकपन है।
भरी जवानी में भी सूझता,
उसको हर पल बचपन है।।

इक वसीम वो भी है,
जो शायर बना फिरता है।
किस्से, कहानियों के बीच,
वो लायब्रेरी में मिला करता है।।

इक वसीम वो है,
जो गाता और बजाता है।
धुन में अपनी होता है और,
अपनी ही धुन गाता है।।

एक वसीम वो है,
जो यारों के संग रहता है।
कभी झूटी, कभी सच्ची,
बातें कई करता है।।

इक वसीम जो देख के दुनिया,
दुनिया से उखड़ता है।
देख के जुल्मों सितम सारे,
आंखें बंद करता है।।

इक वसीम जो खोया है,
कहीं रात अंधेरे में।
ना मिले तो बेहतर है...
ना मिले तो बेहतर है...

Thursday, 11 July 2019

मेरा धरम

मुझे हक नहीं है, यारों जीने का,
यारों मुझको अब, मर जाना चाहिए।
या बांध के खुद को किसी बडे धर्म से,
मुझे धरम का गुलाम, हो जाना चाहिए।।

किसी और का वजूद नहीं, बस मेरा धरम
सारे जमाने को ये समझाना चाहिए।
धर्म के नाम पर, धर्म को तोडकर,
इक नया धर्म हमको बनाना चाहिए।।

कोई जहां में हो तो मेरे धरम का हो,
जात पात सबको समझाना चाहिए।
मेरे धरम का हो तो मुझसे भी छोटा हो,
जात का टाईम बाॅम लगाना चाहिए।।

मेरे धरम में हो भले लाख बुराई,
औरों को शीशा हर पल दिखलाना चाहिए।
यारों की अच्छाई में फायदा यही तो है,
नाजायज फायदा उठाना चाहिए।।

फर्क कोई झूट और सच में ना रहे,
बातों को इस तरह उलझाना चाहिए।
तोडना हो सच तो बस इतना ही करें,
चौथा स्तंभ तोडना, मिटाना चाहिए।।

जो तैरती जाती हैं बहाव के खिलाफ,
वो मछलियां जाल में फंसाना चाहिए।
बचना, ना देख ले हमको कहीं ' रवीश '
उजाले में हमको नहीं आना चाहिए।।

Saturday, 6 July 2019

तुम्हारी यादें और इंतजार...

तुम्हारी यादें,
तुम्हारी अदाओं से भी ज्यादा जानलेवा हैं,
तुम्हारे यादों से बचने की सभी नाकाम कोशिशों के बाद,
तुमसे मिलने का वक़्त तय करता हूं,
तो मेरी जान लेनेवाली चीजों में
इक और चीज शुमार हो जाती है,
इंतजार...
इक लंबा सा इंतजार,
उस वक़्त से, जब से मनसूबा बनाया है,
उस वक़्त तक, जब तक तुम्हारी जानिब सफर शुरू नहीं होता,
और फिर बेचैनी, बेताबी तब तक, जब तक तुम्हारा दीदार नहीं होता,
इक दिन का, मगर इक साल की तरह लगने वाला,
इंतजार...

Monday, 1 July 2019

बारिश

सुबह को मैंने आंखें खोली,
खिड़की से एक चिड़िया बोली,
देख ले बाहर जा कर बंदे,
रात में कुछ है बारिश हो ली,

मैंने बाहर जाकर देखा,
सारे खुश थे धरती गीली,
सर्द हवा थी, रूत भी जवाॅ थी,
मैं वापस बिस्तर पर लौटा,

मैंने फिर तकिए को देखा,
आंसू से वो भी था गीला,
मैं जब वजह सोचने बैठा,
कान में तेरी दूरी बोली,

"बस बहुत, अब मिलने आओ,
दिल को मेरे ना तड़पाओ,
साथ तुम्हारा मैं जो पा लूं,
बारिश में मैं भी तो न्हा लूं,"

मैंने फिर बाहर को देखा,
खूबसूरत एक नजारा,
सारा नजारा धुंधला हो गया,
हो गई थी आंखें जो गीली...