Monday, 17 September 2018
वास्ता
Sunday, 16 September 2018
मोबाईल
जो मोबाईल जुड़ता गया, रिश्ते टूटते गए,
जब रिश्ते टूटते गए, तो हम भी टूटते गए...
Saturday, 15 September 2018
प्यास
Thursday, 13 September 2018
रुलाते क्यूँ हो...
मिटाने तुझ पे अपनी जान हम तैयार भी है,
Wednesday, 12 September 2018
कोवळं प्रेम
Wednesday, 5 September 2018
कुत्ता
फिक्र जिनकी की होती है, वो जमात ही कुछ और है,
कुत्ता हूं मैं सड़क का, मेरी बात ही कुछ और है।
गंदा सा रहेता हूं मैं, टुकडों पर पलता हूं,
मेरा दिन कुछ और है, मेरी रात ही कुछ और है।।
ना इंसान बनाओ मुझे की मै गिरना चाहता नहीं,
इंसान धोखेबाज हैं मेरी बात ही कुछ और है।
मुझे मेरे मालिक की जुस्तजू, मुझे मेरी रोटी से प्यार है,
चाहे हिन्दू हो या मुसलमां हो, वो बात ही कुछ और है।।
आज का दिन...
कुछ अच्छा यार तो हो आज के दिन,
बस उनका दीदार तो हो आज के दिन।
उन्हीं के तस्सव्वूर में निकल रहे थे DH से,
वो मुस्कुराए सामने आकर, आज के दिन।।
हो खुदाया गर तेरी यूंही रहेमत,
जिंदगी भर रहे यू आज का दिन।
एक बाकी है इज़हार ए मोहब्बत यारों,
शायद मिल जाए मुझे आज का दिन।।
Monday, 3 September 2018
बहु दिन भए प्रभु...
बहु दिन भए प्रभु, जरा रूप दिखाओ,
या धुन बांसुरी की कोई सुनाओ।
सम्भवामि युगे युगे कहेके चले गए,
बहु युग चले गए हैं प्रभु लौटके आओ।।
बनके सखा जरा यारी सिखाई दो,
करें गोपियों की इज्ज़त ये बताई दो।
या हो कोई पीड़ा परबत बनी हुई,
करंगुली पे अपनी पीड़ा उठाई दो।।
जो लीला आपने रची मिलने सुदामा को,
उस तरह की प्रभु कोई लीला तो दिखाओ।
बहु दिन भए प्रभु, जरा रूप दिखाओ,
या धुन बांसुरी की कोई सुनाओ।।