Monday, 17 September 2018

वास्ता


जीतकर दुनिया खुदसे हारने के लिए,
मेरा "मैं" ही काफी है, मुझे मारने के लिए।
हसींन शख़्स कोई सर को झुकाये क्यूँ हैं,
ठोकरें मिलती है शख़्सियत निखारने के लिए।।

वो दरख़्त जिनके सर, आसमान में हैं,
मिली है उनको जमीं, तने गाढ़ने के लिए।
गुरुर पंखों पे करके तू चला जा उड़कर, 
अहमियत शाख़ पर घरौंदे की जानने के लिए।।

वो पंछी छोड़ गए है जो अब चमन अपना,
बहार आये तो किसको बहारने के लिए।
मेरा जमीं से वास्ता है, आ गया वापस,
कोई तो आये नजर मेरी उतारने के लिए।।

Sunday, 16 September 2018

मोबाईल


जो मोबाईल जुड़ता गया, रिश्ते टूटते गए,
जब रिश्ते टूटते गए, तो हम भी टूटते गए...

वो रिश्ते जो कभी अपने हुआ करते थे,
सारे खुशियां, सारे गम मिलकर सहा करते थे।
एक एक करके सारे रूठते गए,
सारे रूठते गए तो हम भी टूटते गए।।

कभी तो हम हवाओं को छुआ करते थे,
इन्द्रधनुष से चुराकर रंग, जिंदगी में भरा करते थे।
इन्द्रधनुष के रंग आसमां में छुटते गए,
रंग छुटते गए तो हम भी टूटते गए।।

फुल शाखों के साथ गालों पर भी खिला करते थे,
वो गाल जो खिलखिलाकर हसा करते थे।
खिलखिलाना रुक गया और फुल मिटते गए,
फुल मिटते गए तो हम भी टूटते गए।।

जो मोबाईल जुड़ता गया, रिश्ते टूटते गए,
जब रिश्ते टूटते गए, तो हम भी टूटते गए...

Saturday, 15 September 2018

प्यास



प्यासे रहकर जानिये, ये प्यास क्या है,
मशक्कत के बाद सुकून की आस क्या है।
उम्र भर तलाशता रहा चैन-ओ-सुकून मैं,
जब रुक गया तो जाना तलाश क्या है।।

दुनिया के नक्शे कदम पर चलके कौन खुश रहा,
सब जानते हैं गम की खराश क्या है।
कभी देखकर उदास खुद को मुस्कुराओ तो,
जानलों ख्वाहिशों की लाश क्या है।।

दिन के अंधेरे में जो कभी खो गए थे हम,
जाना उजालें की ये रात क्या है।
मुस्कुराते लोग मिलेंगे जो हर कहीं,
सोचो के छुपाती आंसुओं को वो बात क्या है।।

Thursday, 13 September 2018

रुलाते क्यूँ हो...


जो सुन न सकूँ बात बताते क्यूँ हो 
मेरी जॉ मुझको ऐसे तुम, रुलाते क्यूँ हो।

माना है प्यार बहोत, प्यार का इज़हार भी है,
इश्क़ है जिससे मेरा ऐसा तू यार भी है,
मिटाने तुझ पे अपनी जान हम तैयार भी है,
बेवजह मुझको दिलदार सताते क्यूँ हो,
मेरी जॉ मुझको ऐसे तुम, रुलाते क्यूँ हो।।

ना करो शक मुझपे, के तुमसे दूर हूँ मैं,
मिलना चाहती हूँ, हालात से मज़बूर हूँ मैं,
करो यकीं के सिर्फ़ तुम्हारी ही हूँर हूँ मैं,
हूँर के अपने आसु यूँ बहाते क्यूँ हो,
मेरी जॉ मुझको ऐसे तुम, रुलाते क्यूँ हो।।

जो सुन न सकूँ बात बताते क्यूँ हो 
मेरी जॉ मुझको ऐसे तुम, रुलाते क्यूँ हो...


Wednesday, 12 September 2018

कोवळं प्रेम

लहानपणीची वेणी सैल होते,
केस स्वातंत्र्य पसंत होऊ लागतात।
ढळू नये म्हणून खांद्यावरचा पदर,
हाताने धरून ठेऊ लागतात।।

नव्या नजरा, नव्या भावना,
सारं काहीं नवं असतं।
मनाला गुदगुल्या करणारं, 
आपलं कुणी हवं असतं।।

निर्णय चुकतील की असतील बरोबर 
याचा नसतो काही नेम।
कोवळं मन, कोवळी पालवी,
अन् कोवळं कोवळं प्रेम।।


Wednesday, 5 September 2018

कुत्ता

फिक्र जिनकी की होती है, वो जमात ही कुछ और है,
कुत्ता हूं मैं सड़क का, मेरी बात ही कुछ और है।
गंदा सा रहेता हूं मैं, टुकडों पर पलता हूं,
मेरा दिन कुछ और है, मेरी रात ही कुछ और है।।

ना इंसान बनाओ मुझे की मै गिरना चाहता नहीं,
इंसान धोखेबाज हैं मेरी बात ही कुछ और है।
मुझे मेरे मालिक की जुस्तजू, मुझे मेरी रोटी से प्यार है,
चाहे हिन्दू हो या मुसलमां हो, वो बात ही कुछ और है।।

आज का दिन...

कुछ अच्छा यार तो हो आज के दिन,
बस उनका दीदार तो हो आज के दिन।
उन्हीं के तस्सव्वूर में निकल रहे थे DH से,
वो मुस्कुराए सामने आकर, आज के दिन।।

हो खुदाया गर तेरी यूंही रहेमत,
जिंदगी भर रहे यू आज का दिन।
एक बाकी है इज़हार ए मोहब्बत यारों,
शायद मिल जाए मुझे आज का दिन।।

Monday, 3 September 2018

बहु दिन भए प्रभु...

बहु दिन भए प्रभु, जरा रूप दिखाओ,
या धुन बांसुरी की कोई सुनाओ।
सम्भवामि युगे युगे कहेके चले गए,
बहु युग चले गए हैं प्रभु लौटके आओ।।

बनके सखा जरा यारी सिखाई दो,
करें गोपियों की इज्ज़त ये बताई दो।
या हो कोई पीड़ा परबत बनी हुई,
करंगुली पे अपनी पीड़ा उठाई दो।।

जो लीला आपने रची मिलने सुदामा को,
उस तरह की प्रभु कोई लीला तो दिखाओ।
बहु दिन भए प्रभु, जरा रूप दिखाओ,
या धुन बांसुरी की कोई सुनाओ।।