वो पेड़ों का मैल है, जिसपे तुम जिंदा हो,
क्या पेड़ों के कटने से, जरा भी शर्मिंदा हो।
धरती सहे रही है सब, इसका ना इम्तेहान लो,
मिटा रहे हो जिस धरती को, उसके तुम बाशिंदा हो।।
Thursday, 23 August 2018
बाशिंदा
Monday, 20 August 2018
किसान
सबको खाना देता था, वो कई दिनों से भूखा था,
सुना है एक गांव में, कोई किसान रहेता था,
बेटी की शादी करनी थी, बेटे को भी पढ़ाना था,
गिरवी थे जो बीवी के गहेने भी छुड़वाना था,
इस बार जरूर मिलेगा भाव, हर बार ये कहेता था,
सुना है एक गांव में, कोई किसान रहेता था।
अब खेती की फ़िक्र नहीं, रोटी भी अब रोज मिलेगी,
आत्महत्या कर ली उसने, सरकार "मदत" तो जरुर करेगी,
सुख चुका है अब वो पानी, आंखों में जो बहता था,
सुना है एक गांव में कोई किसान रहता था,
सबको खाना देता था, वो कई दिनों से भूखा था।।
जिंदगी
हम समेटते जायेंगे जब बिखरती जाएगी,
जिंदगी हमारी तो यूंही चलती जाएगी।
गुज़र रहा है वक्त जिस ख़ामोशी से,
ख़ामोश रहे तो उसी तरह जिंदगी गुजरती जाएगी।।
ख़ामोश हैं हम तो है जमाना हमारा यार,
बोलने लगे तो यारी टूटती सी जाएगी।
एक मोहब्बत की शमा दिल में जलाए रक्खे हैं,
इसी तरह तो जिंदगी उजलती जाएगी।।
Sunday, 19 August 2018
जिहाद
सियासत चला पाओगे तुम, ये दिल नहीं मानता,
देश बचा पाओगे तुम, ये दिल नहीं मानता।
संविधान का रास्ता बहुत मुश्किल है तुम्हारे लिए,
इस रास्ते पे चल पाओगे तुम, ये दिल नही मानता।।
तुम्हारी सोच अलग है, तुम्हारे यार-दोस्त अलग,
हमारे साथ रह पाओगे तुम, ये दिल नहीं मानता।
रोटी, कपड़ा और मकान जरूरतें है हमारी,
ये दिला पाओगे तुम? ये दिल नहीं मानता।।
जो पढ़ने लिखने का हक हमसे छीन रहे हो तुम,
हम पढ़ना लिखना छोड़ देंगे ये दिल नहीं मानता।
भीमा ने कहा के पढ़ो, मिलकर जिहाद करो,
भीमा को चुप कराओगे तुम, ये दिल नहीं मानता।।
Thursday, 16 August 2018
सहारा
Friday, 10 August 2018
बदल जाते हैं...
रिश्ते बदल जाते हैं, नाते बदल जाते हैं,
वक्त बदलता है तो लोग बदल जाते हैं।
हमको भी ना समझना कोई दुध का धुला,
हो कोई मजबूरी हो तो, हम भी बदल जाते हैं।।
सीखी हैं जहान से जो बातें नई नई,
पैमाने अदब-ओ-हया के, सारे बदल जाते हैं।
पहनते थे कल तक सिल कर फटे कपड़े,
फटे ना हो तो अब कपड़े बदल जाते हैं।।
मजहब ये तेरा मेरा है सियासती खेल,
चलो यारों इंसानों में सारे बदल जाते हैं।
रक्खों ना कोई उम्मीद जमाने को बदलने की,
ख़ुदको बदल के देखो, जमाने बदल जाते हैं।।
Thursday, 9 August 2018
सांवरी...
तेरी जुल्फों से होकर जो हवाएं गुजरती हैं,
बस वही शायरी बनके मेरी कलम से उतरती हैं।
लाज़मी होगा तुझको गुरूर - ए - हुस्न होना,
जो इतनी नजरें तुझपर, चलती हैं, रुकतीं हैं।।
चलना तेरा चमन में, नहीं कोई छोटी बात,
तेरे ही तो पिछे ये बहारें चलती हैं।
सांवरा सा रंग तेरा, तुझसे ही है श्याम,
तेरी ही इजाजत से तो रात उगती ढलती है।।
Wednesday, 8 August 2018
मुश्किल है...
आवाम का सरकार से हाथ मिलाना भी मुश्किल है,
आवाम का सरकार से दूर जाना भी मुश्किल है।
सरकार जब माने है पैसेवालों को सरकार,
आवाम का फिर आवाज़ उठाना भी मुश्किल है।।
पैर है जिस जमीं पर मेरे, वो जमीं मेरी नहीं,
हाथ उठाकर आसमां को, नीचे लाना भी मुश्किल है।
ऐ धरती मां बता क्या हम तेरे बच्चें नहीं,
क्या बच्चों का अपनी मां पे हक जताना भी मुश्किल है।।
Tuesday, 7 August 2018
इंतजाम
कमालिये दुनिया में जितने रिश्ते थे कमाने से,
गुजरते गुजरते गुजर जायेंगे जमाने से।
हसते मुस्कुराते रहते हैं सबके साथ,
वरना हम नहीं हैं कुछ याद आने से।।
हमारे ना होने से, अच्छा ये काम होगा,
खाली मयखाने का, एक जाम होगा।
हसीनाओं का हमसे छूटेगा पिछा,
यारों के कानों को आराम होगा।।
जिंदा हूं तो हूं दिलफेंक मनचला सा,
मरने के बाद मेरा, ना कोई काम होगा।
Notebook, cellphone, बिस्तर मेरे room में रहेंगे,
कब्र में कफ़न से बस, मेरा इंतजाम होगा।।