Thursday, 29 August 2019

दूरी

तेरे और मेरे बीच की दूरी
मैं कुछ इस तरह मिटा रहा हूं।
वो गीत जो तुम गुनगुनाती थी
वो गीत अब मैं गुनगुना रहा हूं।।

तुम्हारे दुपट्टे की खुशबू लेकर,
तसव्वुर में तुमको ला रहा हूं।
तुम आकर जगाओगी,
इस खयाल में सोता जा रहा हूं।।

इक हफ्ते को मैं दिन रात,
घंटों, पहर में तोड बिता रहा हूं।
मैं सब्र अपने आप का,
हर पल आजमा रहा हूं।।

तेरे और मेरे बीच की दूरी,
मैं कुछ इस तरह मिटा रहा हूं।
वो गीत जो तुम गुनगुनाती थी,
वो गीत अब मैं गुनगुना रहा हूं...

कई टुकड़ों में बटती जा रही है

जिंदगी कई टुकड़ों में बटती जा रही है,
बस दिखावे में सिमटती जा रही है।

कोई पैदा हो सिख तो, सुरिंदर हो,
हो हिन्दू तो, राम या नरिंदर हो,
हो मुसलमान तो हो ओसामा या ओवैसी,
हो बौद्ध तो, भीम या गौतम हो,
जात धरम में कितने, बटती जा रही है,
बस दिखावे में सिमटती जा रही है।

इस आगे हम नहीं बढ़नेवाले,
किसी इन्सा के लिए हम नहीं लड़नेवाले
अपने छोटी सी दुनिया में सिमट जाएंगे हम,
कीड़े की तरह जी कर, मर जाएंगे हम,
इंसानियत अब मिटती जा रही है,
बस दिखावे में सिमटती जा रही है।

है तोडना दिल का अब मजाक की बात,
संजीदा बात मेरी, बाकी है मजाक की बात,
जब भी करता हूं मैं यारों में बस नाम की बात,
भूल जाता हूं मैं अक्सर संविधान की बात,
वो liberty, equality, fraternity नहीं याद आ रही है,
बस दिखावे में सिमटती जा रही है।

जिंदगी कई टुकड़ों में बटती जा रही है,
बस दिखावे में सिमटती जा रही है।

जहान-ए-'झुबेदा'

जिंदगी आमादा जिए जाने को,
उसपे है याद तेरी सताने को।
खो कर सब तुझको जो पा लिया,
और क्या रह गया है पाने को।।

तेरी आदत सी हो गई है अब,
जान दे दूं क्या ये छुडाने को।
मर भी जाऊं तो रूह भटकेगी,
लौट आएगी सनम खाने को।।

भरी महफिल में नाम लेके तेरा,
हुए मशहूर हर जमाने को।
कोई पूछे के कहाॅ चलें हैं 'वसीम',
चलें जहान-ए-'झुबेदा' बसाने को।।

Thursday, 22 August 2019

जागो, आवाज उठाओ

जागो, आवाज उठाओ
जागो, आवाज उठाओ

समाज तोड तंत्र का हिस्सा ना बनो,
समाज तोड वाणी का किस्सा ना बनो।
सोए हो तो जाग जाओ,
बेहोश हो तो होश में आओ।।
जागो, आवाज उठाओ
जागो, आवाज उठाओ

अलग अलग फूलों से बगिया खिल जाती है,
अलग अलग रंगों से तस्वीर बन जाती है।
इन बागों में बहार लाओ,
इस तस्वीर में जान लाओ।।
जागो, आवाज उठाओ
जागो, आवाज उठाओ

लोकतंत्र बचाने हेतु जागना है,
जिम्मेदारी से अपनी नहीं भागना है।
बगीचे के सर पे आग लगी है जाग जाओ,
"हम भारत के लोग" वाला "हम" बनके दिखाओ।।
जागो, आवाज उठाओ
जागो, आवाज उठाओ...

Thursday, 8 August 2019

मैं अपने भगवान को बचा रहा हूं?

मैं अपने भगवान को बचा रहा हूं,
उस इंसान की जान लेकर,
जो मेरे भगवान को,
उसका भगवान नहीं मानता,

मैं अपने भगवान को बचा रहा हूं,
खुद को किसी का गुलाम बनाकर,
जो मुझमें नफरत,
और सिर्फ नफरत का जहर घोल रहा है,

मैं अपने भगवान को बचा रहा हूं,
कुछ पैसों के एवज,
अपनी आजादी गवाकर,
जिसके लिए मेरे पुरखों ने जान दी,

मैं अपने भगवान को बचा रहा हूं,
देश के नाम पर,
जिसकी किसी को फिक्र नहीं है,
और जिसको है वो चुप हैं,

मैं अपने भगवान को बचा रहा हूं,
मेरे भगवान को भुलाकर,
जो भूके को रोटी, प्यासे को पानी देने की बात करता था,
उच नीच, अमीर गरीब कोई भेद नहीं करता था,

लेकीन,
जिन लोगों ने मुझे भगवान बचाने को कहा है,
उनका भगवान...?
उनका भगवान स्विस बैंक में,
बडा सा आंकडा बना बैठा है।।

Friday, 2 August 2019

मौत का इजहार...

मौत का इजहार किया है कभी?
नहीं, तो फिर करके देखो,
खयालों में ही सही,
एक बार मर के देखो,
अच्छा लगेगा।

अच्छा लगेगा,
जब सांसे रफ्ता रफ्ता बोझिल हो जाएंगी,
सांस लेना मेहनत का काम मालूम होगा,
आंखों के सामने जो नजारा होगा,
वो भी धुंधलाता जाएगा,
दिल का धड़कना कम होते होते रुक सा जाएगा,
आप महसूस करोगे आप के रगों में दौड़ते हुए खून को,
जो धीरे धीरे ठहर रहा होगा,
और आप को हल्का हल्का सुनाई दे रहा होगा,
लोगों का रोना।

जो रो रहे होंगे उनका शुक्रिया अदा करें,
उस से ज्यादा वो कुछ कर भी नहीं सकते,
उनका भी शुक्रिया करें जो आप को,
आप की मंजिल तक पहुंचाने वाले हैं,

आप को पता भी नहीं चलेगा की,
कब आप का बदन ठंडा पड़ गया,
आप को बड़े प्यार से आप के चाहनेवाले घुस्ल देंगे,
आप को अल्लाह के दरबार में पेश होने के लिए,
साफ शफ़्फ़ाक कफन पहनाया जाएगा,
सूरमा, इत्तर लगाया जाएगा,
और फिर,
शुरू होगा आपका आखरी सफर,
कब्रस्तान तक,
रास्ते में आपको कई जाने अनजाने लोग मिलेंगे,
वैसे ही जैसे जिंदगी में मिले थे,
सब को मोहब्बत से अलविदा कहीयेगा,
आप कब्रस्तान पहुंच जाएंगे,
आप के लिए नमाज - ए - जनाजा, आखरी दुआ,
दरूद-ओ-शरीफ पढा जा रहा होगा,
आप को प्यार करनेवाले
अपने हाथों से आप को मिट्टी के हवाले करेंगे,
आप को कब्र में रखा गया होगा,
आप को आप पर पड़ रहे मिट्टी की आवाज सुनाई देगी,
फिर उनके कदमों की आवाज जो,
इस से आगे आप के साथ नहीं आ सकते,
और इस तरह एक खेल खतम हो जाएगा,
शायद किसी और खेल के शुरू होने के लिए,

अब अपने खयालों से बाहर आईये,
और सोचिये,
आप क्यू जी रहे हैं?

Thursday, 1 August 2019

औरत और आदमी

तुने उसको दिल था सौपा,
दिल पे उसने वार किया।
तुने जब उसको ठुकराया,
उसने तुझको प्यार किया।।

नर्म शीशा था दिल तेरा,
तोड कर बेकार किया।
दुनिया की नजरों में फिर,
तुझको गुन्हागार किया।।

तु थी इन्सा, पहले से ही,
हुकूक तुझको मिलने थे।
देके तेरे हुकूक तुझको,
तुझ पर फिर उपकार किया।।

रब ही जाने, रब ने तुझको,
किस मिट्टी का बनाया है।
उसकी सजा का दिन जब आया,
तुने दिन इतवार किया।।