Monday, 11 February 2019

जज़्बात जरा तोल दो...

खुलती हवा में जुल्फों को जरा खोल दो,
दिल की बात अाझादी से बोल दो।
कब तक करोगी दरख्वास्त जमाने से,
की मेरे जज़्बात जरा तोल दो।।

है मुहब्बत तो हाॅ, आझादी है तुम्हें,
नहीं तो ना, ये भी आझादी है तुम्हें।
जो चुप्पी होटों पे लगा रख्खी है तोड दो,
कब तक करोगी दरख्वास्त जमाने से,
की मेरे जज़्बात जरा तोल दो।।

जलता है जमाना, जज़्बात पाता है गलत,
मोल जज्बातों का अक्सर लगाता है गलत।
ना हो पैसा जब तक कहीं कोई,
सब जमाने को वो नजर आता है गलत।।
तुम्हारा भी लगा है गलत मोल बोल दो,
कब तक करोगी दरख्वास्त जमाने से,
की मेरे जज़्बात जरा तोल दो।।

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