बाहर, ये इन्कलाब के नारे कौन लगा रहा है,
ऐसे लग रहा है, कोई हमें बुला रहा है।
आजादी की लड़ाई तो मेरे पुरखों ने लडी थी,
ये आज मुझमें खून क्यूं उबला जा रहा है।।
जुल्म तो जुल्म है, हिन्दू पे हो या मुसलमां पे,
कौन धरम के नाम पर देश तोडता जा रहा है।
आज़ादी की जंग लड़ने बच्चे सड़क पे निकले है,
कौन इनपे हमला करके मुस्कुरा रहा है।।
उन से कहो मन की बात बाहर आ कर कर लें कभी,
सरकार होकर, सरकार के पिछे छिपता जा रहा है।
देखना आसमाॅ में खुं से सुर्खी नजर आएगी,
समझना हुकूमत का सूरज ढलता जा रहा है।।
ऐसे लग रहा है, कोई हमें बुला रहा है।
आजादी की लड़ाई तो मेरे पुरखों ने लडी थी,
ये आज मुझमें खून क्यूं उबला जा रहा है।।
जुल्म तो जुल्म है, हिन्दू पे हो या मुसलमां पे,
कौन धरम के नाम पर देश तोडता जा रहा है।
आज़ादी की जंग लड़ने बच्चे सड़क पे निकले है,
कौन इनपे हमला करके मुस्कुरा रहा है।।
उन से कहो मन की बात बाहर आ कर कर लें कभी,
सरकार होकर, सरकार के पिछे छिपता जा रहा है।
देखना आसमाॅ में खुं से सुर्खी नजर आएगी,
समझना हुकूमत का सूरज ढलता जा रहा है।।
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