इस मुल्क का होना है तो,
कागज संभालकर रक्खों।
दिल में चाहे गोडसे रक्खों,
जेब में गांधी संभालकर रक्खों।।
आपको इस मुल्क में,
पैदा होने की जरूरत नहीं,
घुसपैठिए अगर हो तुम तो,
शर्मिंदा होने की जरूरत नहीं।
थाम कर हाथ झूठ का,
धरम संभालकर रक्खों।
इस मुल्क का होना है तो,
कागज संभालकर रक्खों।।
बिक गया है मीडिया,
बदल गई है सच्चाई।
ये बात ना फिर हम से कहेना,
ये बात ना हम तक क्युं आई।।
कान और आंखें नोच लो अपनी,
मुंह में जबान दबाकर रक्खों।
इस मुल्क का होना है तो,
कागज संभालकर रक्खों।।
इस मुल्क का होना है तो,
कागज संभालकर रक्खों।
दिल में चाहे गोडसे रक्खों,
जेब में गांधी संभालकर रक्खों।।
कागज संभालकर रक्खों।
दिल में चाहे गोडसे रक्खों,
जेब में गांधी संभालकर रक्खों।।
आपको इस मुल्क में,
पैदा होने की जरूरत नहीं,
घुसपैठिए अगर हो तुम तो,
शर्मिंदा होने की जरूरत नहीं।
थाम कर हाथ झूठ का,
धरम संभालकर रक्खों।
इस मुल्क का होना है तो,
कागज संभालकर रक्खों।।
बिक गया है मीडिया,
बदल गई है सच्चाई।
ये बात ना फिर हम से कहेना,
ये बात ना हम तक क्युं आई।।
कान और आंखें नोच लो अपनी,
मुंह में जबान दबाकर रक्खों।
इस मुल्क का होना है तो,
कागज संभालकर रक्खों।।
इस मुल्क का होना है तो,
कागज संभालकर रक्खों।
दिल में चाहे गोडसे रक्खों,
जेब में गांधी संभालकर रक्खों।।
No comments:
Post a Comment