Wednesday, 10 June 2026

वो कहानी

मैं नहीं चाहता वो कहानी दोहराई जाये 
छुपाकर पानी आग लगाई जाये 
झुलसकर मरनेवालों की चींखे सुनाई दें तो 
कान में पैसों की रुई दबा दी जाये 

बच्चा मर गया भूख से, उसे भूख पता नहीं 
सजा भुगत ली मगर, गुनाह पता नहीं 
वो खाते है हाजमोला, हक़ खाने के बाद 
एक हम है जिन्हे अपना हक़ पता नहीं 


भूक लगी तो सोच रहा हूँ 
इक मशीन बना दी जाये 
रोटी को डालकर रोटी की 
कई कॉपियां बना ली जायें 

हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई ,
सब में इक इक बाटी जाये 
हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई ,
सब में इक इक बाटी जाये



यूं तो कमी नहीं है लड़कियों की दुनियाँ में 

लेकिन उनकी बात अलग है 

जो मेरे ख्यालों को अपने जुबाँ से कहती है 

और नेक राह पर चलती रहती हैं 


वो जब जिंदगी की बात करती है 

तो सारे गम , सारी खुशियाँ ,

एक माला में पिरो जाते हैं 


वो जब अहसासों की बात करती है 

तो माँ के पहलु से ले कर 

दोस्त के कंधे तक 

सारे अहसासात याद आते है 


वो जब मस्ती मजाक करती है मेरे साथ 

तो मैं रब का शुक्र अदा करता हु उस पल के लिए 

यूं तो कमी नहीं है लड़कियों की दुनियाँ में 

लेकिन उनकी बात अलग है 


मैं मिला हूँ ऐसीही कुछ लड़कियों से 

उन में से एक ने मुझे दीन की राह दिखाई 

और एक इन्सान बनने के करीब ले आई 

अल्लाह उन्हें खुश रक्खें