Thursday, 31 October 2019

मेरे पीछे इक दुनिया है...

मेरे पीछे इक दुनिया है,
मेरे आगे इक दुनिया।
इक छोडूं तो मैं नहीं,
इक छोडू तो चैन नहीं।।

कितने हम लोगों से मिले,
कितने रिश्तेदार बनें।
रिश्ता इंसानियत का यारों,
बोलो जाने कौन नहीं।।

बुजुर्गों के सामने हम,
सर को झुकाया करते हैं।
इसलिए ऊंचा सर है अपना,
बात तो कोई और नहीं।।

एक ही रब के सारे बंदे,
नाम अलग और धाम अलग।
जब चलना जोर है उसका,
चलना कोई जोर नहीं।।

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