Tuesday, 22 October 2019

दिया

यहां पर जहां पर मैं आया गया हूं,
लाया गया या, बुलाया गया हूं।
अंधेरे से मैं कितने घिर तो गया हूं,
खयालों से अपने जलाया गया हूं।।

बस मोम हूं मैं, ना कुछ और हूं मैं,
हवा से मै कितना, सताया गया हूं।
मुझे ना ही पूछो अंजाम मेरा,
धुआं बन के बादल में छाया गया हूं।।

मगर एक कह दूं, मै बात सबको,
दिए से दिया मै जलाया गया हूं।
की होगा उजाला, जहां में हमारे,
उम्मीद पर इस, लगाया गया हूं।।

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