Tuesday, 26 November 2019

संविधान छीन लो ...

जो दिया था 'बाबा' ने, सब वो इनसे छीन लो,
एकता भी छीन लो, एकात्मता भी छीन लो।
वो किताबें, वो कलम, वो कापीयां भी छीन लो,
पढ़ने लिखने का मिला वो हक भी इनसे छीन लो।।

हम भारत के लोग कहकर उसने सबको जोडा था,
ये भी इक ताकत है इन की, ये भी इनसे छीन लो।
वो जो संविधान को तकिया बनाके सोए हैं,
जागने से पहले उनके, संविधान छीन लो।।

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