आ मिल तु कभी मुझको,
मेरी भी खबर ले,
ऐ बेखबर तू कभी,
मेरी भी खबर ले।
तु है अगर सिक्ख तो मैं सिक्ख बनूंगी,
तेरे लिए गुरू को प्रणाम करूंगी,
तु है अगर मुसलमा तो मुसलमान बनूंगी,
अपना बनाके तुझको, या अल्लाह कहूंगी,
तु है अगर जो क्रिश्चन तो भी खुश हूं मैं,
ईसा मसीह को भी अपना कहूंगी मैं,
मै हूं तेरे लिए ना जाने कितने सफर से,
तेरे लिए ही गुजरी हूं अंजान डगर से,
दुनिया को देखने दे मेरी जात पात को,
तु देख ले बस मुझे इन्सा की नजर से,
आ मिल तु कभी मुझको,
मेरी भी खबर ले,
ऐ बेखबर तू कभी,
मेरी भी खबर ले...
मेरी भी खबर ले,
ऐ बेखबर तू कभी,
मेरी भी खबर ले।
तु है अगर सिक्ख तो मैं सिक्ख बनूंगी,
तेरे लिए गुरू को प्रणाम करूंगी,
तु है अगर मुसलमा तो मुसलमान बनूंगी,
अपना बनाके तुझको, या अल्लाह कहूंगी,
तु है अगर जो क्रिश्चन तो भी खुश हूं मैं,
ईसा मसीह को भी अपना कहूंगी मैं,
मै हूं तेरे लिए ना जाने कितने सफर से,
तेरे लिए ही गुजरी हूं अंजान डगर से,
दुनिया को देखने दे मेरी जात पात को,
तु देख ले बस मुझे इन्सा की नजर से,
आ मिल तु कभी मुझको,
मेरी भी खबर ले,
ऐ बेखबर तू कभी,
मेरी भी खबर ले...
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