तेरे जिस्म की सेज मना कर दूं,
मैं कैसे बता तुझको फनां कर दूं।
मोहब्बत के शजर की एक कली हो तुम,
मैं कैसे तोड़ने का गुनाह कर दूं।।
वो ना हुक्म कर जो मैं कर नहीं सकता,
वो ना मांग जिसको मना कर दूं।
तेरे खिलने से खिल जाए बगिया सारी,
आ तेरे वास्ते रब से ये दुआ कर दूं।।
थाम लूं इक हाथ में हाथ तेरा,
दूसरे हाथों से दूर ये जहां कर दूं।
बस मिलाकर नजरें पल भर के लिए,
ना भूले ज़माना वो फसाना कर दूं।।
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