शराब के नशे में, तेरा साथ ढूंढता हूं,
हाथों में मै मेरे, तेरा हाथ ढूंढता हूं।
तू पास नहीं, दूर सही, तो चलो दूर ही सही,
मै आप में तेरा वजूद, दिन रात ढूंढता हूं।।
आतीं हैं बहारें तो, आकर चली जाएं,
आयें हसीनाएं, रिझाकर चली जाएं।
भेद पाये दिल को, बस तुम्हारी नजर के तीर,
दिल की गहराइयों में, वो तीर ढूंढता हूं।।
इक उम्र कट रही हैं, कुछ पल ही लग रही हैं,
साथ तेरे दुनिया, महेफिल सी लग रही है।
सांसों के दर्मियाॅ जो फासला है थोडा,
उन फासलों पल में, बस तुम को ढूंढता हूं।।
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