Thursday, 21 March 2019

मेरे यार

मुझे अपने यारों से उम्मीद नहीं है,
ये दुनिया ही कुछ यारों दौलत परस्त है।
मै मुझको मिलने वाले हर शय में मस्त हूं,
वो उसको मिलने वाले हर शय में मस्त है।।

उम्मीदें हैं उसको मुझसे, यूं तो कई,
मेरी एक उम्मीद से, वो पस्त है।
दौलत पास है मगर साफ दिल नहीं,
बस यहीं मेरे यार ने, खाई शिकस्त है।।

सीनेसे लगने वाले भी तोड़तें हैं दिल,
मेरी समझ को ये बडी लंबी सी जीस्त है।
इन्सा गुरूर करता है तेरे जहॉ पे रब,
तू ही बता ये बात, कहॉ तक दुरुस्त है।।

Wednesday, 20 March 2019

आशिकी

मेरी आशिकी है तारीफ रब की,
तेरा गुरूर तेरे हुस्न का है।
तेरा हुस्न है मेरे रब का,
बेखबर क्या तुझे इतना पता है।।

तू जो इतराए यू जो अपने हुस्न पर।
सुरज भी तो ढलता है शाम को मगर।।
याद तुझको रहती नहीं, बात ये अगर,
बता इसमें मेरी भला, क्या खता है।।

तारीफ तेरे हुस्न की, जब करता हूं मैं,
हर लफ्ज़ में अपने रब को मिलता हूं।
माना है मुझमें बुराई लाख मगर,
कोई बुरा खयाल दिल से लापता है।।

Monday, 11 March 2019

शराब के नशे में

शराब के नशे में, तेरा साथ ढूंढता हूं,
हाथों में मै मेरे, तेरा हाथ ढूंढता हूं।
तू पास नहीं, दूर सही, तो चलो दूर ही सही,
मै आप में तेरा वजूद, दिन रात ढूंढता हूं।।

आतीं हैं बहारें तो, आकर चली जाएं,
आयें हसीनाएं, रिझाकर चली जाएं।
भेद पाये दिल को, बस तुम्हारी नजर के तीर,
दिल की गहराइयों में, वो तीर ढूंढता हूं।।

इक उम्र कट रही हैं, कुछ पल ही लग रही हैं,
साथ तेरे दुनिया, महेफिल सी लग रही है।
सांसों के दर्मियाॅ जो फासला है थोडा,
उन फासलों पल में, बस तुम को ढूंढता हूं।।

कली

तेरे जिस्म की सेज मना कर दूं,
मैं कैसे बता तुझको फनां कर दूं।
मोहब्बत के शजर की एक कली हो तुम,
मैं कैसे तोड़ने का गुनाह कर दूं।।

वो ना हुक्म कर जो मैं कर नहीं सकता,
वो ना मांग जिसको मना कर दूं।
तेरे खिलने से खिल जाए बगिया सारी,
आ तेरे वास्ते रब से ये दुआ कर दूं।।

थाम लूं इक हाथ में हाथ तेरा,
दूसरे हाथों से दूर ये जहां कर दूं।
बस मिलाकर नजरें पल भर के लिए,
ना भूले ज़माना वो फसाना कर दूं।।

Wednesday, 6 March 2019

आकाल

जब पानी बहता रहता था,
दिल और बहाओ कहता था।
अब आकाल पडा रहता है,
हम पानी पानी कहते हैं।।

है पानी की किल्लत इतनी,
हम प्यासे ही मर जायेंगे।
ना पाप भी हम धो पायेंगे,
ये सारा जमाना कहता है।।

Saturday, 2 March 2019

अलविदा

अलविदा कह रहे हैं,
जुदा हो रहे हैं,
वक़्त के तगाजे,
अदा हो रहे हैं।

जो नहीं बदलता,
बदलाव ही तो है बस,
बदलाव के जहाॅ में,
हम जो बदल रहे हैं।।

मजबूरी है कोई
शौक नहीं यारों,
छोड़कर ये मंजिल,
नई राह चल रहे हैं।

जो वक़्त है गुजारा,
ता उम्र होगा दिल में,
जिस वक़्त के साये में,
एहसास पल रहे हैं।।