वो कहते हैं के मैं झूठ कहेता हूं,
झूठी तारीफ करता रहता हूं,
उनसे गुजारिश है...
उनसे गुजारिश है के कुछ यूं करें,
कभी फुरसत में आईना लेकर,
खुद को देखें वो प्यार से यूं कर,
लेके नजरें अपनी जुल्फों से,
ले चलें भौंहों तरफ धीरे से,
फिसलकर फिर अपने गालों से,
आए होटों की तरफ हौले से,
मुस्कुराहट भर कर, दिल की चेहरेपर,
फिर थुड्डी की तरफ आ जाए,
थोडा सा और फिर से मुस्काए,
थोडा सा और फिर से मुस्काए,
चल दें फिर होंट से ऊपर की ओर,
नाक की छोर से आंख का छोर,
अपनी आंखों को आंख में भरकर,
देख लो एक नजर छुप छुप कर,
फिर ना कहेना की कोई और है वो,
आईना है या कुछ और है वो,
फिर शरमाके पूछ लेना ये,
क्या मेरे साथ चाय तुम लोगे?
वो कहें 'हॉ' तो ये समझ जाना,
जिसकी तारीफ मैंने की थी कभी,
हॉ, वही तो हो तुम जोहरा जबीं,
हॉ, वही तो हो तुम जोहरा जबीं...
झूठी तारीफ करता रहता हूं,
उनसे गुजारिश है...
उनसे गुजारिश है के कुछ यूं करें,
कभी फुरसत में आईना लेकर,
खुद को देखें वो प्यार से यूं कर,
लेके नजरें अपनी जुल्फों से,
ले चलें भौंहों तरफ धीरे से,
फिसलकर फिर अपने गालों से,
आए होटों की तरफ हौले से,
मुस्कुराहट भर कर, दिल की चेहरेपर,
फिर थुड्डी की तरफ आ जाए,
थोडा सा और फिर से मुस्काए,
थोडा सा और फिर से मुस्काए,
चल दें फिर होंट से ऊपर की ओर,
नाक की छोर से आंख का छोर,
अपनी आंखों को आंख में भरकर,
देख लो एक नजर छुप छुप कर,
फिर ना कहेना की कोई और है वो,
आईना है या कुछ और है वो,
फिर शरमाके पूछ लेना ये,
क्या मेरे साथ चाय तुम लोगे?
वो कहें 'हॉ' तो ये समझ जाना,
जिसकी तारीफ मैंने की थी कभी,
हॉ, वही तो हो तुम जोहरा जबीं,
हॉ, वही तो हो तुम जोहरा जबीं...