Sunday, 15 September 2019

तुम, जोहरा जबीं,

वो कहते हैं के मैं झूठ कहेता हूं,
झूठी तारीफ करता रहता हूं,
उनसे गुजारिश है...

उनसे गुजारिश है के कुछ यूं करें,
कभी फुरसत में आईना लेकर,
खुद को देखें वो प्यार से यूं कर,
लेके नजरें अपनी जुल्फों से,
ले चलें भौंहों तरफ धीरे से,
फिसलकर फिर अपने गालों से,
आए होटों की तरफ हौले से,

मुस्कुराहट भर कर, दिल की चेहरेपर,
फिर थुड्डी की तरफ आ जाए,
थोडा सा और फिर से मुस्काए,
थोडा सा और फिर से मुस्काए,

चल दें फिर होंट से ऊपर की ओर,
नाक की छोर से आंख का छोर,
अपनी आंखों को आंख में भरकर,
देख लो एक नजर छुप छुप कर,
फिर ना कहेना की कोई और है वो,
आईना है या कुछ और है वो,

फिर शरमाके पूछ लेना ये,
क्या मेरे साथ चाय तुम लोगे?
वो कहें 'हॉ' तो ये समझ जाना,
जिसकी तारीफ मैंने की थी कभी,
हॉ, वही तो हो तुम जोहरा जबीं,
हॉ, वही तो हो तुम जोहरा जबीं...

उन अमीरों से पूछकर देखो

उन अमीरों से पूछकर देखो,
इतने बडे वो हुए कैसे,

किस जंगल का काटा है टुकडा,
किस के पानी की, चोरी की है,
किस की झोपडी उजाडी है,
किस के हाथों से रोटी है छीनी,
उन अमीरों से पूछकर देखो,
इतने बडे वो हुए कैसे।

वो, जो उनके जात का ना था,
वो अंधेरे में आज तक क्यूं है,
वो जो कहते हैं सबका साथ रहे,
इतने ऊंचाई पे वो अलग क्यूं हैं,
उन अमीरों से पूछकर देखो,
इतने बडे वो हुए कैसे।

मैंने देखा है उनका सारा जुगाड,
इक जहर सा फैला रक्खा है,
कोई आवाज ना उठाए कभी,
भीड तंत्र ऐसे सजा रक्खा है,
उन अमीरों से पूछकर देखो,
इतने बडे वो हुए कैसे।

मै तो जागा हूं आप भी जागो,
की चौकीदार नहीं है कोई,
दिल में अपनी, नफरत की जगह,
भर दो प्यार भरा गीत कोई,
उन अमीरों से पूछकर देखो,
इतने बडे वो हुए कैसे।

अपना गीत जब सुनेंगे वो,
पसीने उनके छूट जाएंगे,
मिट्टी पैरों से खिसक जाएगी,
चलते चलते वो लड़खड़ाएंगे,
उन अमीरों से पूछकर देखो,
इतने बडे वो हुए कैसे...

Monday, 9 September 2019

श्रावणबाळ

फर्ज का कर्ज अदा कर दूं, एहसान का इंतजाम कैसे करुं।
मैं गांजा शराब पीकर, माॅ-बाप को सलाम कैसे करूं।।

मैं ही था उनके सारी, जिंदगी भर की कमाई और।
बुरी लत में खुद को मैं, खर्च तमाम कैसे करूं।।

मजबूत चाहिए लाठी वो, जिसको सहारा बनना है।
अपनी कमजोरी का जिक्र, सरे आम कैसे करूं।।

बैठ के जिनके कंधे पर, दुनिया देखी थी मैंने।
उन बूढे कंधों की मैं, अब शाम कैसे करूं।।

जाने क्यूं स्कूल में हमको, श्रावणबाळ पढ़ाते थे।
मैं थोडी ना श्रावणबाळ हू, माॅ-बाप की खिदमत कैसे करुं।।

Sunday, 8 September 2019

चलो ऐसा कर के देखते हैं...

चलो ऐसा कर के देखते हैं,
मौब लिंचिंग वाली सड़क से गुजर के देखते हैं।
लोग चुप नहीं हैं, मैं ही बहेरा हूं शायद,
लोगों के होटों पे नजरें फेर के देखते हैं।।

क्या लोग टूटने लगे हैं इक दूजे से,
चलो हम उनको जोड के देखते हैं।
उम्मीद है किसीको संविधान तो याद होगा,
वो किताब साथ ले जा कर के देखते हैं।।

ये क्या उदासी छाई है हर जगह,
चलो "शैलेंद्र" का "तु जिंदा है" छेडके देखते हैं।
या मन करे भजन सुनने का,
"शकील बदायूंनी" का भजन सुनके देखते हैं।।

ये लोग पराए से महसूस होते हैं,
चलो दिल को झुटा समझ के देखते हैं।
क्या मुझे अब लोगों पे यकीन नहीं करना चाहिए,
मेरे देश के लोग हैं, यकीं कर के देखते हैं।।

Friday, 6 September 2019

मेरी भी खबर ले...

आ मिल तु कभी मुझको,
मेरी भी खबर ले,
ऐ बेखबर तू कभी,
मेरी भी खबर ले।

तु है अगर सिक्ख तो मैं सिक्ख बनूंगी,
तेरे लिए गुरू को प्रणाम करूंगी,
तु है अगर मुसलमा तो मुसलमान बनूंगी,
अपना बनाके तुझको, या अल्लाह कहूंगी,
तु है अगर जो क्रिश्चन तो भी खुश हूं मैं,
ईसा मसीह को भी अपना कहूंगी मैं,

मै हूं तेरे लिए ना जाने कितने सफर से,
तेरे लिए ही गुजरी हूं अंजान डगर से,
दुनिया को देखने दे मेरी जात पात को,
तु देख ले बस मुझे इन्सा की नजर से,

आ मिल तु कभी मुझको,
मेरी भी खबर ले,
ऐ बेखबर तू कभी,
मेरी भी खबर ले...