बहुत दिनों से जानता हूं मैं तुमको,
एक दो बार बात भी कर चुका हूं,
मगर, जिस दिन से तुमको देखा था,
उस दिन से लेकर आज तक,
मैं जब भी तुम्हारे बारे में सोचता हूं,
तुम्हें देखता हूं,
या बीच राह में तुम, जब भी तुम नजर आती हो,
मैं सोचता हूं कि यह कैसे मुमकिन है,
किसी का चेहरा इतना जादुई कैसे हो सकता है,
के उस को देखूं तो कुछ और ना देखूं,
के उस को सोंचूं तो कुछ और ना सोचूं,
के उस को समझूं तो कुछ और ना समझूं,
कि उसको चाहूं तो कुछ और ना चाहूं,
शायद, मै सब कुछ भूल जाता हूं,
जब तुम नजर में आती हो,
शायद खुद को भी भूल जाता हूं,
तुमको लगता होगा गुरूर मुझमें,
लेकिन मैं तुम से शरमाता हूं,
शायद, डरता हूं की दिल की बात कहीं बता ना दूं,
कभी सोचता भी हूं की बता दूं तुमको,
बहुत दिनों से जानता हूं मैं तुमको,
एक दो बार बात भी कर चुका हूं,
मगर, जिस दिन से तुमको देखा था,
उस दिन से लेकर आज तक,
मैं जब भी तुम्हारे बारे में सोचता हूं,
तुम्हें देखता हूं.....
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