Thursday, 20 June 2019

दरख़्त


मै आया था मै चला गया, मुझे हसते हसते विदा करो,
मेरी छांव को, मेरे पत्तों को, ना दिल से अपने जुदा करो।

जो हो कभी कोई धूप में, उसे छांव देना ना भूलना,
उसे नाम धाम औे जात धर्म, ये कोई बात ना पूछना।
है यही दुआ की मेरी तरह, तुम भी उसको याद हो,
मै बाट खुशियां खुश रहा, और तुम भी ऐसेही शाद हो।।

मेरा घर तुम्हारे दिल में और, किसी दिल में तुम्हारा भी हो घर,
मैने जी ली अपनी जिंदगी, ना कोई गिला है ना कोई है डर।
तुम जीना अपनी जिंदगी, कभी अपना फर्ज ना भूलना,
जो कभी हो कोई धूप में, उसे छांव देना ना भूलना।।

 मै आया था मै चला गया, मुझे हसते हसते विदा करो,
मेरी छांव को, मेरे पत्तों को, ना दिल से अपने जुदा करो...

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