Saturday, 21 December 2019

इस मुल्क का होना है तो...

इस मुल्क का होना है तो,
कागज संभालकर रक्खों।
दिल में चाहे गोडसे रक्खों,
जेब में गांधी संभालकर रक्खों।।

आपको इस मुल्क में,
पैदा होने की जरूरत नहीं,
घुसपैठिए अगर हो तुम तो,
शर्मिंदा होने की जरूरत नहीं।
थाम कर हाथ झूठ का,
धरम संभालकर रक्खों।
इस मुल्क का होना है तो,
कागज संभालकर रक्खों।।

बिक गया है मीडिया,
बदल गई है सच्चाई।
ये बात ना फिर हम से कहेना,
ये बात ना हम तक क्युं आई।।
कान और आंखें नोच लो अपनी,
मुंह में जबान दबाकर रक्खों।
इस मुल्क का होना है तो,
कागज संभालकर रक्खों।।

इस मुल्क का होना है तो,
कागज संभालकर रक्खों।
दिल में चाहे गोडसे रक्खों,
जेब में गांधी संभालकर रक्खों।।

Thursday, 19 December 2019

जंग

ये जो जंग हम लड़ रहे हैं,
ये जंग नफरत के खिलाफ है,
मुहब्बत के लिए है,

मुहब्बत,
हर जात से,
हर धरम से,
हर शख्स से,
हर कौम से,
हर किसी से,

इस जंग मे मुश्किलें तो आएंगी,
हर तरीके से आवाज दबा दी जाएगी,
लेकिन हमें रुकना नहीं है,
नफरत के सामने झुकना नहीं है,
लडते रहेना है,

हमें लडना है,
आजादी को याद करके,
अशफाक को याद कर के,
भगत सिंग को याद करके,
राम प्रसाद को याद करके,
मौलाना आजाद को याद करके,
हमें लडना है अपनी विरासत के लिए,
हमें लडना है आपस में मुहब्बत के लिए,
हमें लडना है गांधी का सहारा लेकर,
हमें लडना है एकता का इशारा लेकर,
हमें लडना है अपने मुस्तकबिल के लिए,
हमें लडना है आनेवाले कल के लिए,
हमें लडना है...
इन्किलाब जिंदाबाद!
इन्कीलाब जिंदाबाद!!