Thursday, 31 October 2019

मेरे पीछे इक दुनिया है...

मेरे पीछे इक दुनिया है,
मेरे आगे इक दुनिया।
इक छोडूं तो मैं नहीं,
इक छोडू तो चैन नहीं।।

कितने हम लोगों से मिले,
कितने रिश्तेदार बनें।
रिश्ता इंसानियत का यारों,
बोलो जाने कौन नहीं।।

बुजुर्गों के सामने हम,
सर को झुकाया करते हैं।
इसलिए ऊंचा सर है अपना,
बात तो कोई और नहीं।।

एक ही रब के सारे बंदे,
नाम अलग और धाम अलग।
जब चलना जोर है उसका,
चलना कोई जोर नहीं।।

Tuesday, 22 October 2019

दिया

यहां पर जहां पर मैं आया गया हूं,
लाया गया या, बुलाया गया हूं।
अंधेरे से मैं कितने घिर तो गया हूं,
खयालों से अपने जलाया गया हूं।।

बस मोम हूं मैं, ना कुछ और हूं मैं,
हवा से मै कितना, सताया गया हूं।
मुझे ना ही पूछो अंजाम मेरा,
धुआं बन के बादल में छाया गया हूं।।

मगर एक कह दूं, मै बात सबको,
दिए से दिया मै जलाया गया हूं।
की होगा उजाला, जहां में हमारे,
उम्मीद पर इस, लगाया गया हूं।।