अंधेरे और उजाले के बीच,
कहीं शाम के वक्त,
जहॉ गम का अंधेरा है,
ख्वाबों में सवेरा है,
और मांगे की हसी से चराग जलते हैं,
रोशन सितारे भी जहां गर्दीशों में मिलते हैं,
कुछ फूल हैं जो अपनी शाखों से,
खिलने से पहले ही, टूटकर बिखरते हैं,
सुना है फरिश्ते भी इन राहों से,
करके बंद आंखें गुजरते हैं,
मैं इन्हीं राह पर तो चलता हूं,
खो के खुद को सभी को मिलता हूं,
अंधेरे और उजाले के बीच,
कहीं शाम के वक्त...