खूबसूरत हैं आप और आप पर ही दिल आया हैं,
अगर आप ये जान लो तो अच्छा हो।
वक़्त हुआ है के हम लौट के जा रहे हैं,
जाने से पहले आप हमें पहचान जाओ तो अच्छा हो।।
अरमानों का बोझ लिए चल रही है जिंदगी,
जाने किस मोड़ से गुजर रही है जिंदगी।
उम्र भर मेहनत की, हासिल ये मकाम किया,
और किस मकाम की उम्मीद, कर रही है जिंदगी।।
युं तो कहने सुनने को, कई अपने पास है,
हाल-ए-दिल कहने से क्युं, झिझक रही है जिंदगी।
बस झिझक जाने से, अपने दूर हो जाते हैं,
जान-बुझकर रिश्तों को, क्यु बिखर रही है जिंदगी।।
जानते है गुरूर की, इंतेहा मगर फ़िर भी,
जाने किस पे गुरूर, कर रही है जिंदगी।
वो कौन सा चिराग़ है, जला है और बुझा नहीं,
'नवाज़' का कलाम, याद कर रही है जिंदगी।।
किस्मत ने ली करवट तो क्या क्या नहीं होता,
मगर ये क्यूं होता है के तु मेरा नहीं होता।
मारकर दिल को अपने फ़िर भला हम मुस्कुराइए क्यूं,
और किस मुस्कुराहट पर ज़माने का पहरा नहीं होता।।
तुमने छोड़ा ना ज़माना, और तुम करती भी क्या,
किसी पराये पर यूंही भरोसा नहीं होता।
तुम और मैं, दोनों, हाथ मिलाते रह गए,
काजल आंखों का होता है, नज़र का नहीं होता।।
अल्हड़पन, मासूमियत हम दोनों को ले डूबी,
वक़्त ने कुछ और वक़्त दिया होता तो क्या होता।
तुम सामने आओ और जान लूं की तुम ख़ुश हो,
तुम्हारे दीदार से ज्यादा कोई पल सुनहरा नहीं होता।।
कुछ तो रिश्ता रहा होगा पिछले जनम का तुमसे,
यूंही किसी से रिश्ता कोई गहरा नहीं होता।
किस्मत ने ली करवट तो क्या क्या नहीं होता,
मगर ये क्यूं होता है के तु मेरा नहीं होता।।