Sunday, 28 October 2018

अच्छा हो


रोज-ब-रोज अपनी मुलाक़ात हो, तो अच्छा हो,
सुकून दे जो दिल को, ऐसी बात हो तो अच्छा हो।
यूँ तो मिलते है रोज मगर अंजानो की तरह,
कभी अपनों की तरह मिल लो तो अच्छा हो।।

खूबसूरत हैं आप और आप पर ही दिल आया हैं,
अगर आप ये जान लो तो अच्छा हो।
वक़्त हुआ है के हम लौट के जा रहे हैं,
जाने से पहले आप हमें पहचान जाओ तो अच्छा हो।।


जब कभी


जब कभी खुदको टूटता पाया हमने,
अपनी किस्मत पे ऐतराज जताया हमने।
और हम करते भी तो क्या करते,
खुद को था जिन हालात में पाया हमने।।

घने कोहरे में जब राह दिखाई ना दी,
प्यार से ठोकरों को भी खाया हमने।
स्याह थी रात और कुछ नजर ना आता था,
वक्त आने पर खुद को भी जलाया हमने।।

अब भी जब कभी पाया है गम,
देख आँखों में जिंदगी के मुस्कुराया हमने।
जिंदगी के उठाये हर नाज-ओ-अंदाज,
और जिंदगी से मोहब्बत को निभाया हमने।।

जब कभी खुदको टूटता पाया हमने,
अपनी किस्मत पे ऐतराज जताया हमने...

मुस्कुराते चेहरें ...



मुस्कुराते चेहरे अक्सर खतरनाक होते हैं,
काली अमावस की रात होते हैं.
दिखाई नहीं देते होंगे मगर,
समझ नहीं आते होंगे मगर,
मुस्कुराते चेहरे अक्सर खतरनाक होते हैं,
काली अमावस की रात होते हैं.

बहोत गम सहे होते हैं,
टुटके बहोत बिखरे होते हैं,
हालात की आग में झुलसकर 
 ये बहोत निखरे होते हैं 
मुस्कुराते चेहरे अक्सर खतरनाक होते हैं,
काली अमावस की रात होते हैं.

ईनको भीड़ रास नहीं आती 
ये काफी अकेले होते हैं 
ईनके अपने कुछ 
अलग ही उसूल होते हैं 
मुस्कुराते चेहरे अक्सर खतरनाक  होते हैं,
काली अमावस की रात होते हैं.

इन्हें खुदकी फिक्र नहीं होती 
औरों की होती हैं 
जाने किस गम में ईनकी आंखें रोतीं हैं 
खामोशी से अपनेही जिद पे अड़े होते हैं 
मुस्कुराते चेहरे अक्सर खतरनाक होते हैं,
काली अमावस की रात होते हैं.

Monday, 22 October 2018

जिंदगी

अरमानों का बोझ लिए चल रही है जिंदगी,
जाने किस मोड़ से गुजर रही है जिंदगी।
उम्र भर मेहनत की, हासिल ये मकाम किया,
और किस मकाम की उम्मीद, कर रही है जिंदगी।।

युं तो कहने सुनने को, कई अपने पास है,
हाल-ए-दिल कहने से क्युं, झिझक रही है जिंदगी।
बस झिझक जाने से, अपने दूर हो जाते हैं,
जान-बुझकर रिश्तों को, क्यु बिखर रही है जिंदगी।।

जानते है गुरूर की, इंतेहा मगर फ़िर भी,
जाने किस पे गुरूर, कर रही है जिंदगी।
वो कौन सा चिराग़ है, जला है और बुझा नहीं,
'नवाज़' का कलाम, याद कर रही है जिंदगी।।

Thursday, 11 October 2018

किस्मत

किस्मत ने ली करवट तो क्या क्या नहीं होता,
मगर ये क्यूं होता है के तु मेरा नहीं होता।
मारकर दिल को अपने फ़िर भला हम मुस्कुराइए क्यूं,
और किस मुस्कुराहट पर ज़माने का पहरा नहीं होता।।

तुमने छोड़ा ना ज़माना, और तुम करती भी क्या,
किसी पराये पर यूंही भरोसा नहीं होता।
तुम और मैं, दोनों, हाथ मिलाते रह गए,
काजल आंखों का होता है, नज़र का नहीं होता।।

अल्हड़पन, मासूमियत हम दोनों को ले डूबी,
वक़्त ने कुछ और वक़्त दिया होता तो क्या होता।
तुम सामने आओ और जान लूं की तुम ख़ुश हो,
तुम्हारे दीदार से ज्यादा कोई पल सुनहरा नहीं होता।।

कुछ तो रिश्ता रहा होगा पिछले जनम का तुमसे,
यूंही किसी से रिश्ता कोई गहरा नहीं होता।
किस्मत ने ली करवट तो क्या क्या नहीं होता,
मगर ये क्यूं होता है के तु मेरा नहीं होता।।