वोट तेरा कोई खरीदें ना ठान ले,
जान ले सियासत, सियासत ना जान ले।
आगाज कुछ तो कर अपने वजूद का,
चाल सियासत दारों की, पहेचान ले।।
क्यू टूट गया है भरोसा-ए-सियासत,
कौन है फैला रहा मेरे देश में नफरत,
क्या हासिल है किसीको इससे,
क्या कुर्सी के लिए छोड दें, आपस की मुहब्बत,
ना मिटने पाए देश की तहजीब जान ले,
जान ले सियासत, सियासत ना जान ले...
जाल जात पात का बिछायेंगे ये जरूर,
मजहब को मुद्दा बनाएंगे ये जरूर,
मन नहीं भरेगा जब इन बातों से,
सेना को बीच में लाएंगे ये जरूर,
तू मगर अपने तजुर्बे से काम ले,
जान ले सियासत, सियासत ना जान ले...
दो पल तेरे कदमों में गिरना है इन्हें,
फिर पांच साल तुमको, कुचलना है इन्हें,
तुम पाई पाई जोड के दे देना बैंक को,
बिज़नेसमेन के लोन माफ करना है इन्हें,
चौकीदार किसके हैं ये बात जान ले,
जान ले सियासत, सियासत ना जान ले...
वोट तेरा कोई खरीदें ना ठान ले,
जान ले सियासत, सियासत ना जान ले।
आगाज कुछ तो कर अपने वजूद का,
चाल सियासत दारों की, पहेचान ले।।
No comments:
Post a Comment