Sunday, 26 May 2019

नया तो कुछ भी हुआ नहीं है


नया तो कुछ भी हुआ नहीं है,
नहीं तो, कुछ भी हुआ नहीं है,

चेहरे नए-पुराने आए,
वादे नए बताने आए,
कब से राहें देख रहे हैं,
शायद कोई निभाने आए।
हर बार जो हो रहा था,
इस बार भी हुआ वही है,
नया तो कुछ भी हुआ नहीं है,
नहीं तो, कुछ भी हुआ नहीं है।।


लगी मिली-भगत की बोली,
जीत गई चोरों की टोली,
नोटों की कीमत लगाकर,
वोटों की गठरी है खोली।
पहले भी जो ठग रहा था,
इस बार भी ठगा वही है,
नया तो कुछ भी हुआ नहीं है,
नहीं तो, कुछ भी हुआ नहीं है।।


अदालतें, कानूनसाजी,
सब पे भारी चाल बाजी,
अंमल दारों की कमर है टूटी,
पैसों तले कलम दबा दी।
जम्हूरियत के चार खंबे,
ढूंढ रहा हूं, क्या कहीं हैं,
नया तो कुछ भी हुआ नहीं है,
नहीं तो, कुछ भी हुआ नहीं है।।